Jhiram Ghati Case: झीरम का फैसला आधा-अधूरा न्याय, कांग्रेस ने PC में पूछे कई सवाल
Jhiram Valley Case: झीरम घाटी मामले में NIA कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस ने इसे ‘आधा-अधूरा न्याय’ बताते हुए बड़े नक्सली नेताओं के नाम हटाने, जांच प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठाए हैं।
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कीर्तिमान डेस्क | लक्ष्मी साहू
06 Sep 2026, 07:14 PM
महासमुंद
Jhiram Ghati Case: झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में NIA की विशेष अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस ने महासमुंद में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जांच और न्याय प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस ने अदालत के फैसले का सम्मान करते हुए इसे ‘आधा-अधूरा न्याय’ बताया। पार्टी का कहना है कि अदालत ने NIA की ओर से प्रस्तुत किए गए तथ्यों के आधार पर फैसला दिया है, लेकिन इससे झीरम हमले की पूरी साजिश का पर्दाफाश नहीं हुआ।
कांग्रेस ने कहा कि 25 मई 2013 को हुए झीरम नरसंहार में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं समेत 32 लोगों की हत्या हुई थी। पार्टी के मुताबिक, NIA ने जिन 10 लोगों को गिरफ्तार किया और जिन्हें दोषी ठहराया गया है, वे छोटे स्तर के नक्सली थे। कांग्रेस का सवाल है कि इतनी बड़ी घटना बिना बड़े नक्सली नेताओं की भूमिका के कैसे संभव हो सकती है।
बड़े नक्सली नेताओं के नाम हटने पर सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस ने दावा किया कि NIA की शुरुआती FIR में प्रमुख नक्सली नेताओं गणपति उर्फ मुपल्ला लक्ष्मण राव और रमन्ना के नाम शामिल थे। पार्टी के अनुसार, 21 मार्च 2014 को गणपति और रमन्ना समेत 26 फरार आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी किए गए थे।
कांग्रेस ने सवाल उठाया कि बाद में चार्जशीट से इन बड़े नक्सली नेताओं के नाम क्यों हटा दिए गए? पार्टी ने यह भी पूछा कि झीरम हमले में शामिल बताए गए जिन नक्सलियों ने बाद में आत्मसमर्पण किया, उनसे पूछताछ क्यों नहीं की गई और उन्हें अभियोजित क्यों नहीं किया गया?
कांग्रेस ने जांच पर उठाए कई सवाल
कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में झीरम मामले की जांच को लेकर कई सवाल सामने रखे। पार्टी ने पूछा—
कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा क्यों हटाई गई थी?
यात्रा का मार्ग किसने और क्यों बदला था?
हमले की योजना किसने बनाई थी?
सरकार ने जिन बड़े नक्सलियों के आत्मसमर्पण के बाद उन्हें झीरम हमले में शामिल बताया, उनसे NIA ने पूछताछ क्यों नहीं की?
घटना के प्रत्यक्षदर्शियों और घायलों में से कितने लोगों से NIA ने पूछताछ की?
घायल और जीवित बचे पीड़ितों के बयान क्यों नहीं लिए गए?
प्रभावित लोग कई बार शपथ पत्र के साथ जांच एजेंसियों के सामने पहुंचे, फिर भी उनके बयान जांच का हिस्सा क्यों नहीं बने?
घटना के कई सप्ताह बाद तक शहीदों और घायलों के पर्स, फाइलें और महत्वपूर्ण दस्तावेज घटनास्थल पर क्यों पड़े रहे?
किसी का मोबाइल फोन जब्त क्यों नहीं किया गया?
छत्तीसगढ़ सरकार की पुलिस द्वारा गठित SIT को NIA ने जांच से क्यों रोका?
तत्कालीन मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, मुख्य सचिव, DGP और ADG नक्सल से NIA ने कब पूछताछ की?
कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि भाजपा नहीं चाहती कि झीरम की पूरी सच्चाई सामने आए। पार्टी ने कहा कि झीरम मामले में भाजपा की तत्कालीन सरकार की भूमिका शुरू से ही सवालों के घेरे में रही है।
कांग्रेस के मुताबिक, तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष धर्मलाल कौशिक न्यायिक जांच आयोग के खिलाफ स्टे लेकर आए थे। इसके बाद कांग्रेस सरकार ने छत्तीसगढ़ पुलिस की SIT गठित की तो NIA की जांच को लेकर भी कानूनी विवाद सामने आया। कांग्रेस ने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ पुलिस की SIT के पक्ष में जांच को लेकर फैसला दिया, लेकिन इसके बावजूद साय सरकार ने ढाई साल तक जांच शुरू नहीं की।
‘बड़े नक्सली नेताओं को बचाया गया’
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि NIA की जांच और कार्यप्रणाली से भी कई सवाल उठते हैं। पार्टी का दावा है कि घटना के समय सरकार और नक्सलियों के बीच कथित सांठगांठ थी और अब फैसला आने के बाद भी बड़े नक्सली नेताओं को बचाया गया है। कांग्रेस ने इसे कथित तौर पर सरकार और NIA की नक्सलियों से सांठगांठ का प्रमाण बताया। खल्लारी विधायक द्वारकाधीश यादव ने भी आरोप लगाया कि प्रमुख नक्सली आरोपियों को इसलिए बचाया जा रहा है, ताकि उनके पीछे जुड़े नेताओं को बचाया जा सके।
कांग्रेस बोली- पूरी साजिश का खुलासा जरूरी
कांग्रेस ने कहा कि वह अदालत के फैसले का सम्मान करती है, लेकिन झीरम नरसंहार के पीछे की पूरी साजिश, हमले की योजना, सुरक्षा हटाए जाने, यात्रा का मार्ग बदले जाने और बड़े नक्सली नेताओं की भूमिका का खुलासा होना अभी बाकी है। पार्टी ने कहा कि जब तक इन सवालों के जवाब सामने नहीं आते, तब तक झीरम मामले में न्याय को पूरी तरह से संतोषजनक नहीं माना जा सकता।
खल्लारी विधायक द्वारकाधीश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि झीरम घाटी मामले में प्रमुख नक्सली आरोपियों को जानबूझकर बचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन आरोपियों पर कार्रवाई नहीं होने के पीछे बड़ी वजह यह हो सकती है कि उनके पीछे जुड़े राजनीतिक नेताओं को बचाया जा सके।
विधायक यादव ने सवाल उठाया कि यदि झीरम हमले की पूरी साजिश सामने लानी है, तो केवल छोटे स्तर के आरोपियों पर कार्रवाई से काम नहीं चलेगा। बड़े नक्सली नेताओं की भूमिका और उनके राजनीतिक कनेक्शन की भी जांच होनी चाहिए। कांग्रेस का आरोप है कि बड़े नक्सली नेताओं को जांच के दायरे से बाहर रखने से झीरम नरसंहार की वास्तविक साजिश अब भी सामने नहीं आ पाई है।