देश की राजनीति से इस वक्त एक बड़ी खबर सामने आ रही है। केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से मंगलवार को इस बात की आधिकारिक जानकारी दी गई है। जारी की गई प्रेस रिलीज में बताया गया है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। हालांकि सरकारी स्तर पर अभी तक उनके अचानक इस्तीफा देने की असली वजह साफ नहीं की गई है।
कार्यकाल खत्म होना बनी बड़ी वजह
करीब 65 साल के जॉर्ज कुरियन केरल में भारतीय जनता पार्टी के बहुत सीनियर नेताओं में गिने जाते हैं। वे अगस्त 2024 से जून 2026 तक मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद रहे थे। इसी महीने 21 जून को उनका राज्यसभा कार्यकाल खत्म हुआ था। पार्टी ने 18 जून को हुए चुनाव में उन्हें दोबारा अपना उम्मीदवार नहीं बनाया था। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि हाल ही में हुए केरल विधानसभा चुनाव में पार्टी के उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न करने की वजह से उन्हें दोबारा मौका नहीं मिला। केरल की 140 सीटों में से भाजपा केवल 3 सीटें ही जीत सकी थी।
पीएम मोदी और अमित शाह के भाषणों का करते थे अनुवाद
जॉर्ज कुरियन केरल के एक बड़े ईसाई संप्रदाय सीरो-मालाबार कैथोलिक चर्च से आते हैं। टीवी डिबेट्स में वे बीजेपी का मुख्य चेहरा रहे हैं। जब भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या गृह मंत्री अमित शाह केरल के दौरे पर जाते थे, तो जॉर्ज कुरियन ही उनके हिंदी भाषणों का स्थानीय मलयालम भाषा में अनुवाद यानी ट्रांसलेशन करते थे। साल 2024 में मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में उन्हें मंत्री बनाया गया था। इसके पीछे बीजेपी की रणनीति केरल के ईसाई समुदाय के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की थी, लेकिन चुनावी नतीजों के बाद समीकरण बदल गए।