मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण द्वारा धार जिले के लोहारीखुर्द-आहू-धार मुख्य मार्ग पर 366.39 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से एक नए ब्रिज (पुल) का निर्माण कराया जा रहा है। लेकिन ठेकेदार की धीमी चाल और विभागीय अनदेखी का खामियाजा अब क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों और राहगीरों को भुगतना पड़ रहा है। मानसून की बारिश के बाद हालात और ज्यादा बिगड़ चुके हैं, जिससे कई गांवों का धार शहर से संपर्क लगभग कट सा गया है। पुल निर्माण के दौरान गाड़ियो के आने-जाने के लिए विभाग ने मिट्टी-मुरम डालकर एक कच्चा डायवर्जन (अस्थायी मार्ग) तैयार किया था।
8 गांवों हो रहे ज्यादा प्रभावित
हालांकि, हाल ही में हुई तेज बारिश के पानी में यह अस्थायी रास्ता पूरी तरह बह गया। नतीजतन, अब यह मार्ग पूरी तरह बंद हो चुका है। लोहारीखुर्द-आहू-धार मार्ग इस पूरे क्षेत्र के लिए धार पहुंचने का सबसे प्रमुख रास्ता है, जिसके बंद होने से अब लोग जान जोखिम में डालकर या लंबा चक्कर काटकर जाने को मजबूर हैं। काम में हो रही इस देरी और अव्यवस्था का असर 8 से अधिक प्रमुख गांवों पर सीधा पड़ा है जिसमें लोहारीखुर्द, आकोदा, धामंदा, बालोदा, खरसोड़ा, छटिया, टकरावदा, उटावदा, और भिलगुण शामिल है।रोजाना धार शहर काम पर जाने वाले मजदूरों, दफ्तर के कर्मचारियों, एम्बुलेंस और स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं को सबसे ज्यादा फजीहत झेलनी पड़ रही है।
काम की रफ्तार बेहद सुस्त
ग्रामीणों का कहना है कि करीब পৌने चार करोड़ की लागत के इस प्रोजेक्ट में काम की रफ्तार बेहद सुस्त है। क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि काम में देरी के साथ-साथ गुणवत्ता (क्वालिटी) से भी समझौता किया जा रहा है। ठेकेदार द्वारा सरेआम लापरवाही बरती जा रही है। इस पूरे मामले पर मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण के महाप्रबंधक शौर्यप्रताप सिंह ने सफाई दी है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य में किसी भी तरह की घटिया या गुणवत्ताहीन सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि ग्रामीणों को निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर कोई शिकायत है, तो वे खुद मौके पर जाकर जांच करेंगे और स्थिति का जायजा लेंगे।
काम को लेकर किया शिकायत
"हमने इस बदहाली और घटिया काम को लेकर पहले भी वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की थी, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। हमारी बस यही मांग है कि काम जल्द से जल्द पूरा हो और निर्माण में सही सामग्री का इस्तेमाल किया जाए।" — स्थानीय निवासी