छत्तीसगढ़ और ओडिशा को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-353 पर स्थित हाड़ाबंद ओवरब्रिज की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। कुछ दिन पहले ही ओवरब्रिज पर खराब लाइटों को बदलने और नई वायरिंग का काम कराया गया था, जिसके बाद लोगों को उम्मीद थी कि अब समस्या का स्थायी समाधान हो जाएगा।
लेकिन कुछ ही दिनों बाद पूरी व्यवस्था दोबारा बंद हो गई और पुल फिर अंधेरे में डूब गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या लंबे समय से चली आ रही है। हर बार लाइटें खराब होने के बाद मरम्मत की जाती है, कुछ दिनों तक रोशनी रहती है और फिर वही स्थिति बन जाती है। ऐसे में लोगों का सवाल है कि आखिर लाखों रुपए खर्च होने के बाद भी स्ट्रीट लाइट व्यवस्था स्थायी रूप से क्यों नहीं सुधर पा रही है।
मरम्मत के बाद भी क्यों लौट आती है समस्या?
हाड़ाबंद ओवरब्रिज पर लाइट खराब होने का यह कोई पहला मामला नहीं है। लोगों के अनुसार, पुल बनने के बाद से ही स्ट्रीट लाइटों को लेकर परेशानी बनी हुई है। कई बार सुधार कार्य कराया गया, लेकिन कुछ समय बाद लाइटें बंद हो जाती हैं। स्थानीय नागरिकों ने काम की गुणवत्ता और रखरखाव व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि बार-बार मरम्मत की जरूरत पड़ रही है तो कहीं न कहीं तकनीकी कमी या निगरानी में लापरवाही जरूर है। उनका कहना है कि केवल अस्थायी सुधार के बजाय समस्या का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए। अंधेरे में हादसे का बढ़ा खतरा फिलहाल स्थिति यह है कि पूरा ओवरब्रिज रात के समय अंधेरे में रहता है।सरकारी खर्च के बावजूद व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
यह मार्ग छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच यातायात का महत्वपूर्ण रास्ता है, जहां दिन-रात बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं। अंधेरे के कारण वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पुल पर कई बार मवेशी भी बैठे रहते हैं, जो रात में दिखाई नहीं देते। ऐसे में तेज रफ्तार वाहनों के बीच दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय लोगों ने जल्द से जल्द लाइट व्यवस्था बहाल करने की मांग की है।
नई वायरिंग और स्ट्रीट लाइटों पर राशि खर्च किए जाने के बावजूद कुछ दिनों में व्यवस्था ठप हो जाना कई सवाल खड़े करता है। लोगों का कहना है कि काम पूरा होने के बाद उसकी गुणवत्ता जांच और नियमित निगरानी जरूरी है, ताकि बार-बार वही समस्या सामने न आए। लोग यह भी जानना चाहते हैं कि खराबी की वजह क्या है और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।