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हाड़ाबंद पुल की खराब लाइटें
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लाखों खर्च, फिर भी अंधेरा कायम : कुछ दिन की रोशनी के बाद फिर छाया अंधेरा, हाड़ाबंद ओवरब्रिज की लाइटें बंद

राष्ट्रीय राजमार्ग-353 पर स्थित हाड़ाबंद ओवरब्रिज की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था फिर ठप हो गई है। कुछ दिन पहले ही नई वायरिंग और लाइटों की मरम्मत कराई गई थी, लेकिन अब पूरा पुल अंधेरे में डूबा हुआ है। स्थानीय लोगों ने खराब रखरखाव और काम की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए जल्द स्थायी समाधान की मांग की है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
09 Jul 2026, 12:40 PM
बागबाहरा
छत्तीसगढ़ और ओडिशा को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-353 पर स्थित हाड़ाबंद ओवरब्रिज की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। कुछ दिन पहले ही ओवरब्रिज पर खराब लाइटों को बदलने और नई वायरिंग का काम कराया गया था, जिसके बाद लोगों को उम्मीद थी कि अब समस्या का स्थायी समाधान हो जाएगा। 
लेकिन कुछ ही दिनों बाद पूरी व्यवस्था दोबारा बंद हो गई और पुल फिर अंधेरे में डूब गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या लंबे समय से चली आ रही है। हर बार लाइटें खराब होने के बाद मरम्मत की जाती है, कुछ दिनों तक रोशनी रहती है और फिर वही स्थिति बन जाती है। ऐसे में लोगों का सवाल है कि आखिर लाखों रुपए खर्च होने के बाद भी स्ट्रीट लाइट व्यवस्था स्थायी रूप से क्यों नहीं सुधर पा रही है। 

मरम्मत के बाद भी क्यों लौट आती है समस्या?

हाड़ाबंद ओवरब्रिज पर लाइट खराब होने का यह कोई पहला मामला नहीं है। लोगों के अनुसार, पुल बनने के बाद से ही स्ट्रीट लाइटों को लेकर परेशानी बनी हुई है। कई बार सुधार कार्य कराया गया, लेकिन कुछ समय बाद लाइटें बंद हो जाती हैं। स्थानीय नागरिकों ने काम की गुणवत्ता और रखरखाव व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि बार-बार मरम्मत की जरूरत पड़ रही है तो कहीं न कहीं तकनीकी कमी या निगरानी में लापरवाही जरूर है। उनका कहना है कि केवल अस्थायी सुधार के बजाय समस्या का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए। अंधेरे में हादसे का बढ़ा खतरा फिलहाल स्थिति यह है कि पूरा ओवरब्रिज रात के समय अंधेरे में रहता है। 

सरकारी खर्च के बावजूद व्यवस्था पर उठ रहे सवाल 

यह मार्ग छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच यातायात का महत्वपूर्ण रास्ता है, जहां दिन-रात बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं। अंधेरे के कारण वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पुल पर कई बार मवेशी भी बैठे रहते हैं, जो रात में दिखाई नहीं देते। ऐसे में तेज रफ्तार वाहनों के बीच दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय लोगों ने जल्द से जल्द लाइट व्यवस्था बहाल करने की मांग की है।
नई वायरिंग और स्ट्रीट लाइटों पर राशि खर्च किए जाने के बावजूद कुछ दिनों में व्यवस्था ठप हो जाना कई सवाल खड़े करता है। लोगों का कहना है कि काम पूरा होने के बाद उसकी गुणवत्ता जांच और नियमित निगरानी जरूरी है, ताकि बार-बार वही समस्या सामने न आए। लोग यह भी जानना चाहते हैं कि खराबी की वजह क्या है और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। 

एनएच-353 पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल

हाड़ाबंद ओवरब्रिज ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजमार्ग-353 पर सड़क मरम्मत, रोड मार्किंग, रंग-रोगन और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर भी पहले सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकायतों और खबरों के बाद भी अपेक्षित सुधार नजर नहीं आता। इससे संबंधित एजेंसियों की निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अधिकारी ने जांच कराने की बात कही इस मामले में एनएच की नवपदस्थ सब इंजीनियर प्रीति शर्मा ने बताया कि उन्होंने हाल ही में पदभार संभाला है, इसलिए उन्हें इस समस्या की पूरी जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि वह मामले की जानकारी लेकर पता करेंगी कि ओवरब्रिज की लाइटें किस कारण बंद हुई हैं। उन्होंने यह भी बताया कि हाड़ाबंद ओवरब्रिज की स्ट्रीट लाइट और विद्युत व्यवस्था का काम एनएच द्वारा पीडब्ल्यूडी के ई एंड एम (Electrical & Mechanical) विंग से कराया गया था।
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