जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) महासमुंद में प्रसिद्ध साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद के 147वीं जयंती पर प्राचार्य अरुण कमार प्रधान उप प्राचार्य उमादेवी शर्मा के मार्गदर्शन एवं साहित्यिक प्रभारी टेकराम सेन चमक के संयोजन में ग्रामीण परिवेश में प्रेमचंद जी के जीवन दर्शन पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्राचार्य अरुण प्रधान ने कहा कि प्रेमचंद जी के विभिन्न कृतियों में गोदान ग्रामीण जीवन का सजीव चित्रण करने में विश्व साहित्य में अनेक प्रकार की अकेली रचना है। उप प्राचार्य उमादेवी शर्मा ने कहा कि वे स्वयं उनके लगभग सभी साहित्यकों का अध्ययन कर चुकी है । उनकी सभी रचनाएं वर्तमान समय में समाज के लिये प्रासंगिक है ।
महिलाओं की समस्याओं को लेकर रहते थे चिंतित
कार्यक्रम का संचालन करते हुये कार्यक्रम समन्वयक साहित्यकार टेकराम सेन चमक ने कहा कि प्रेमचंद की नमक का दरोगा, बड़े घर की बेटी, पंच परमेश्वर, परीक्षा एवं मंत्र जैसी प्रमुख काहनियां आज भी पाठकों को आकर्षित करती है। इस अवसर पर सहायक प्राध्यापक सुलमा द्विवेदी, हिन्दी की व्याख्याता सुमन दीवान, दुर्गा सिन्हा ने विचार व्यक्त करते हुये कहा कि प्रेमचंद नारी की विभिन्न समस्याओं को लेकर अत्यधिक चिंतित थे। इसलिये उनके अनेक उपन्यासों में नारी की किसी न किसी समस्याओं का उल्लेख मिलता है।
कार्याक्रम में इनका रहा योगदान
छात्राध्यापकों की ओर से शैलेन्द्र, रोशन, प्रिया खड़ाईत सुरेश, दिया कुम्हार, प्रतिक्षा ने भी संगोष्ठी में हिस्सा लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में सहायक प्राध्यापक के. सिंग, किरण कन्नौजे, तिलोतमा प्रधान, लक्ष्मी सिन्हा, ईश्वर चंद्राकर, झरना साहू, आकांक्षा, गरिमा, तरुण सहित छात्राध्यापक गण रितुराज, रेमन, रोशन, इन्दूमति, यशोदा, प्रिया, समीक्षा तनु, तेरजा, भूपेश, महेश सहित समस्त छात्राध्यापकों का विशेष योगदान रहा। इस अवसर पर प्रेमचंद जी को स्मरण करते हुये उनके 147 वीं जयंती के अवसर पर कंदम का पौधा रोपण किया या। उक्त जानकारी संस्थान की ओर से छात्र परिषद अध्यक्ष रोशन यादव ने दी है ।