तिरुप्पारनकुंड्रम पहाड़ी की चोटी पर स्थित ऐतिहासिक दीप स्तंभ (लैंपपोस्ट) पर दीपक जलाने का मामला एक बार फिर गरमा गया है। मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै खंडपीठ ने इस आदेश को लागू करने में हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार से सीधा सवाल किया है कि आखिर एकल न्यायाधीश (Single Judge) के पुराने आदेश को अमलीजामा पहनाने में प्रशासन को क्या दिक्कतें आ रही हैं? इसके साथ ही अदालत ने सरकार को अपनी अंतिम स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।
"यह लोकतांत्रिक देश है, जनता की भावना का सम्मान हो"
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट का रुख काफी तल्ख रहा। मदुरै जिला कलेक्टर, पुलिस आयुक्त और तिरुप्पारनकुंड्रम मंदिर के कार्यकारी अधिकारी की अपीलों पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी की। जजों ने कहा:
"हम एक लोकतांत्रिक देश में रह रहे हैं। यहाँ जनता की आस्था और भावनाओं का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए। आखिर इस आदेश को लागू करने में प्रशासन को क्या परेशानी आ रही है?"
(कोर्ट) ने साफ किया कि भले ही इस मामले में अवमानना की कार्यवाही लंबित हो, लेकिन अधिकारियों को अदालत के मूल आदेश को लागू करने की दिशा में ठोस प्रयास करने चाहिए।
सरकार ने मांगा समय, दरगाह पक्ष भी रखेगा अपनी बात
सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि अदालत के निर्देशों के पालन को लेकर उच्च अधिकारियों के बीच लगातार मंथन चल रहा है। सरकार की ओर से इस मामले में पूरी रिपोर्ट पेश करने के लिए कुछ और समय की मांग की गई है।
दूसरी ओर, इस मामले में एक नया मोड़ तब आया जब कोर्ट ने सिकंदर दरगाह को भी इस मामले में अपनी बात रखने की इजाजत दे दी। दरगाह पक्ष अब एक पक्षकार याचिका (Impleading Petition) दायर कर अदालत के सामने अपना रुख साफ करेगा।
याचिकाकर्ता रामा रविकुमार के वकील अरुण स्वामीनाथन ने कोर्ट में उम्मीद जताई कि मौजूदा राज्य सरकार जनभावनाओं को समझते हुए पहाड़ी पर दीपक जलाने की अनुमति देने वाले आदेश को जल्द से जल्द लागू करेगी। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 22 जून तक के लिए टाल दी है।
क्या है पूरा विवाद? (फ्लैशबैक)
यह पूरा मामला पिछले साल दिसंबर का है, जब जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन ने तिरुप्पारनकुंड्रम पहाड़ी की चोटी पर बने पारंपरिक दीप स्तंभ पर दीपक जलाने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया था।
अवमानना याचिका: जब कोर्ट के इस आदेश पर प्रशासन ने ढिलाई बरती, तो मदुरै जिला कलेक्टर, पुलिस कमिश्नर और मंदिर के कार्यकारी अधिकारी के खिलाफ कोर्ट की अवमानना (Contempt of Court) का केस दर्ज करा दिया गया।
अधिकारियों की अपील: खुद को फंसता देख अधिकारियों ने इस अवमानना कार्यवाही को रद्द कराने के लिए डिवीजन बेंच का दरवाजा खटखटाया।
अंतरिम रोक: इससे पहले मार्च में, इसी डिवीजन बेंच ने रामा रविकुमार सहित 10 लोगों को पहाड़ी पर जाकर दीपक जलाने और 5 लोगों को वहां पूजा करने की अनुमति देने वाले एकल पीठ के आदेश पर 4 जून तक अंतरिम रोक लगा दी थी।
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार 22 जून को कोर्ट में क्या जवाब दाखिल करती है।