रायपुर का सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम आज उस समय आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठा, जब देश-विदेश से जुटे हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में 'आचार्य पदारोहण एवं सहस्त्रावधान तपस्या महोत्सव' का भव्य शंखनाद हुआ। इस ऐतिहासिक और अलौकिक पल के साक्षी बनने भारत सरकार के लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय विशेष रूप से पहुंचे। दोनों ही शीर्ष नेताओं ने जैन मुनियों के चरणों में वंदन कर आशीर्वाद लिया और आचार्य पद पर प्रतिष्ठित हो रहे पूज्य विनयकुशल मुनि जी महाराज को नमन कर छत्तीसगढ़ की धरा की ओर से उनका अभिनंदन किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में सभा को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि आचार्य पद केवल एक औपचारिक पदवी नहीं है, बल्कि यह कठिन तप, सर्वस्व त्याग, अगाध ज्ञान और संपूर्ण समाज को सन्मार्ग दिखाने वाली साधना का सर्वोच्च प्रतीक है।
मुख्यमंत्री की घोषणा
सर्वधर्म समभाव का संकल्प
मुख्यमंत्री ने इंडोर स्टेडियम के विहंगम दृश्य को देखकर कहा कि आज रायपुर का यह कोना-कोना किसी भौतिक परिसर की तरह नहीं, बल्कि साक्षात ज्ञान और अध्यात्म के महातीर्थ में तब्दील हो चुका है। जैन संतों ने हमेशा जियो और जीने दो के पावन संदेश को जिया है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि छत्तीसगढ़ शांति, कौमी एकता और समृद्ध आध्यात्मिक परंपराओं का गढ़ रहा है। उनकी सरकार सर्वधर्म समभाव की इसी पावन भावना के साथ समाज के हर तबके के उत्थान और राज्य के चहुंमुखी विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।