Mahasamund Car Accident: आधी रात सड़क हादसा, कार ने होर्डिंग को मारी जोरदार टक्कर, पुलिस बोली- हमें जानकारी ही नहीं
Mahasamund Car Accident: खरोरा-बेलसोंडा के बीच 22-23 सितंबर की दरमियानी रात तेज रफ्तार सुजुकी डिजायर ने सड़क किनारे लगे होर्डिंग को जोरदार टक्कर मार दी। कार हादसे के बाद मौके से हटाई गई, प्रत्यक्षदर्शियों ने नाबालिगों के कार चलाने का दावा किया है ।
प्रकाशित: 24 Sep 2026, 07:17 PM· 6 मिनट पढ़ने का समय
महासमुंद
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Mahasamund Car Accident: 22 और 23 सितंबर की दरमियानी रात महासमुंद में नेशनल हाईवे 353 पर एक ऐसा सड़क हादसा हुआ, जिसने सड़क सुरक्षा के साथ-साथ पुलिस की पेट्रोलिंग और सूचना तंत्र पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। खरोरा और बेलसोंडा के बीच लाल रंग की एक सुजुकी डिजायर कार सड़क किनारे लगे होर्डिंग से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि होर्डिंग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के बाद कार में सवार लोग मौके से निकल गए।
घटना के बाद हादसे का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया और स्थानीय स्तर पर इसकी चर्चा भी हुई। लेकिन जब कीर्तिमान की टीम ने इस पूरे मामले की पड़ताल शुरू की और पुलिस से जानकारी लेने की कोशिश की, तो एक अलग ही तस्वीर सामने आई। पुलिस का कहना था कि उसे इस घटना की जानकारी ही नहीं मिली। यानी एक ओर सड़क किनारे दुर्घटना के निशान और क्षतिग्रस्त होर्डिंग मौजूद था, दूसरी ओर घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों के बीच घूम रहा था, लेकिन पुलिस के अनुसार इस संबंध में न कोई शिकायत मिली और न ही थाने में घटना की जानकारी पहुंची।
दुर्घटना मे क्षतिग्रस्त कार और होर्डिंग हादसा इतना जोरदार कि कार भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त
घटना में शामिल कार लाल रंग की सुजुकी डिजायर बताई जा रही है। इसका नंबर CG 04 QA 9588 है। उपलब्ध वाहन जानकारी के अनुसार कार का रजिस्ट्रेशन रायपुर टाटीबंध निवासी केशर अग्रवाल के नाम से बताया जा रहा है। हादसे की तस्वीरों और वीडियो में सड़क किनारे लगा होर्डिंग बुरी तरह क्षतिग्रस्त नजर आता है। टक्कर की तीव्रता को देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि कार काफी तेज गति में रही होगी, हालांकि दुर्घटना के समय वाहन की वास्तविक गति की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। हादसे के बाद सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि कार और उसमें सवार लोग मौके पर नहीं मिले। कार को वहां से हटाया गया या नहीं, इसे किसने हटाया और किस साधन से हटाया गया—इसकी जानकारी भी अब तक सार्वजनिक नहीं हुई है। यदि वाहन दुर्घटना के बाद स्वयं चलने की स्थिति में नहीं था तो उसे हटाने के लिए टो-वेन, क्रेन या किसी अन्य वाहन की जरूरत पड़ी होगी। ऐसे में दुर्घटना के बाद की पूरी गतिविधि भी जांच का हिस्सा बन सकती है।
प्रत्यक्षदर्शियों ने नाबालिगों के कार चलाने की बात कही
स्थानीय स्तर पर इस घटना को लेकर यह भी चर्चा है कि कार में नाबालिग बच्चे सवार थे और वाहन नाबालिग चला रहे थे। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। यदि जांच में यह बात सही निकलती है तो मामला केवल तेज या लापरवाही से वाहन चलाने तक सीमित नहीं रहेगा। नाबालिग को वाहन चलाने की अनुमति किसने दी, वाहन उसके पास कैसे पहुंचा और दुर्घटना के समय वाहन में कौन-कौन लोग मौजूद थे—ये सभी बातें जांच का विषय होंगी। फिलहाल इन सवालों के जवाब सामने नहीं हैं।
कीर्तिमान ने पुलिस से की पड़ताल
इस घटना को लेकर कीर्तिमान की टीम ने पुलिस से संपर्क कर यह जानने की कोशिश की कि क्या दुर्घटना के संबंध में कोई FIR दर्ज हुई है, क्या वाहन को जब्त किया गया है और क्या चालक के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है। पुलिस की ओर से बताया गया कि उसे इस घटना की जानकारी नहीं मिली है। यही जवाब इस मामले को सामान्य सड़क दुर्घटना से आगे ले जाता है। क्योंकि घटना नेशनल हाईवे पर हुई। सड़क किनारे लगे होर्डिंग को नुकसान पहुंचा। हादसे की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए। स्थानीय लोगों के बीच घटना की चर्चा हुई। इसके बावजूद पुलिस के रिकॉर्ड में घटना की कोई जानकारी नहीं होना पुलिस की पेट्रोलिंग और सूचना व्यवस्था को लेकर सवाल पैदा करता है।
नेशनल हाईवे पर होने वाली दुर्घटनाओं में समय पर पुलिस या आपातकालीन सेवा की पहुंच बेहद महत्वपूर्ण होती है। इस मामले में भी यदि दुर्घटना के तुरंत बाद कोई व्यक्ति घायल होता या कोई राहगीर वाहन की चपेट में आता, तो तत्काल पुलिस सहायता की जरूरत पड़ सकती थी। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि हादसे के आसपास उस समय पुलिस की पेट्रोलिंग टीम कहां थी और क्या घटनास्थल से गुजरने वाले किसी पुलिस वाहन या 112 टीम की नजर दुर्घटना पर पड़ी थी। यदि किसी ने सूचना नहीं दी तो यह भी जांच का विषय है कि इतनी बड़ी दुर्घटना पुलिस की नियमित पेट्रोलिंग के दौरान सामने क्यों नहीं आई।
मामला सिर्फ क्षतिग्रस्त होर्डिंग का नहीं
इस घटना में राहत की बात यह है कि अभी तक किसी राहगीर या अन्य व्यक्ति के गंभीर रूप से घायल होने या जान जाने की जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन दुर्घटना की परिस्थितियां बताती हैं कि परिणाम कुछ और भी हो सकता था। अगर उसी समय कोई पैदल राहगीर वहां से गुजर रहा होता? अगर कोई बाइक सवार कार की चपेट में आ जाता? अगर कार सड़क पर किसी दूसरे वाहन से टकरा जाती? ऐसी स्थिति में मामला सिर्फ एक क्षतिग्रस्त होर्डिंग का नहीं रहता। यही वजह है कि सड़क दुर्घटनाओं को केवल हादसा मानकर छोड़ देने के बजाय उनके कारण और जिम्मेदारी की जांच जरूरी होती है।
वाहन मालिक की पहचान सामने, चालक अब भी सवाल
वाहन का नंबर सामने है और उसके रजिस्ट्रेशन की जानकारी भी उपलब्ध बताई जा रही है। ऐसे में दुर्घटना के समय कार किसके पास थी, यह पता लगाने के लिए वाहन मालिक से पूछताछ एक महत्वपूर्ण कड़ी हो सकती है। हालांकि वाहन का मालिक होना और दुर्घटना के समय वाहन चलाना एक ही बात नहीं है। इसलिए चालक की पहचान की पुष्टि जांच के आधार पर ही हो सकती है।
यही वह बिंदु है जहां पुलिस की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि घटना की जानकारी पुलिस तक पहुंचती है तो वाहन की जांच, मालिक से पूछताछ, आसपास के CCTV फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के जरिए घटना की पूरी कड़ी सामने लाई जा सकती है।
पुलिस के जवाब के बाद अब सबसे बड़ा सवाल
इस पूरे मामले में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि पुलिस ने घटना की जानकारी होने से इनकार किया है, जबकि घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया और स्थानीय स्तर पर इसकी चर्चा भी हुई। ऐसे में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कार कौन चला रहा था। सवाल यह भी है कि -
नेशनल हाईवे पर हुई इतनी बड़ी दुर्घटना पुलिस की जानकारी में क्यों नहीं आई?
क्या नियमित पेट्रोलिंग के दौरान घटनास्थल पर पुलिस की नजर नहीं पड़ी?
क्या दुर्घटना के बाद किसी ने 112 या पुलिस को सूचना नहीं दी?
अगर वाहन को मौके से हटाया गया, तो उसे किसने और कैसे हटाया?
क्या वाहन मालिक से यह पता करने की कोशिश हुई कि दुर्घटना के समय कार किसके पास थी?
और अगर प्रत्यक्षदर्शियों का नाबालिग चालक को लेकर किया गया दावा सही निकलता है, तो उस स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी?
इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे।
फिलहाल कीर्तिमान की पड़ताल में सामने आया यह मामला पुलिस की पेट्रोलिंग, सूचना तंत्र और सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल जरूर छोड़ गया है। अब देखना यह है कि पुलिस इस घटना को केवल “जानकारी नहीं मिली” कहकर छोड़ती है या फिर वायरल वीडियो, वाहन नंबर और घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की जांच आगे बढ़ाती है।