social boycott case: अंतर्जातीय विवाह से नाराज समाज के लोगों ने मांगा ₹1.25 लाख जुर्माना, बहिष्कार की धमकी
social boycott case: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के सांकरा थाना क्षेत्र स्थित ग्राम पेंड्रावन में अंतर्जातीय विवाह को लेकर विवाद का मामला सामने आया है। शिकायत के अनुसार, पीड़ित परिवार से कथित तौर पर ₹25,000 और फिर ₹1 लाख जुर्माने की मांग की गई तथा रकम नहीं देने पर सामाजिक बहिष्कार की धमकी दी गई। पुलिस जांच के बाद तीन आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
social boycott case: महासमुंद जिले के सांकरा थाना क्षेत्र से सामाजिक प्रताड़ना और अवैध वसूली की एक गंभीर घटना सामने आई है। ग्राम पेंड्रावन में अंतर्जातीय विवाह से नाराज समाज के दबंगों ने एक परिवार का
सामाजिक बहिष्कार करने की धमकी दी और उनसे कुल 1,25,000 (एक लाख पच्चीस हजार रुपये) के जुर्माने की भारी-भरकम मांग कर डाली। पीड़िता परिवार की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
सांकरा थाना क्षेत्र के ग्राम पेंड्रावन निवासी रसपाल सिदार के नाती बंशीलाल सिदार ने कुछ समय पहले दूसरे समाज की युवती से शादी की थी। इस शादी से समाज के कुछ तथाकथित ठेकेदार नाराज हो गए। जून 2026 में समाज के पदाधिकारियों—कार्तिक राम नेटी, जयचंद पालेश्वर और लक्ष्मण सिदार उर्फ सुधु ने एक राय होकर रसपाल सिदार के घर पर एक बैठक बुलाई। बैठक के दौरान परिवार पर दबाव बनाते हुए तुरंत 25,000 रुपये जुर्माना भरने का फरमान सुनाया गया।इसके महज दो दिन बाद, गांव के रामलाल साहू की किराना दुकान के पास आरोपियों ने पीड़ित परिवार को दोबारा रोका और 1,00,000 रुपये (एक लाख रुपये) अतिरिक्त जुर्माने की मांग रख दी। आरोपियों ने साफ धमकी दी कि यदि यह रकम नहीं दी गई, तो पूरे
परिवार को समाज से बाहर (सामाजिक बहिष्कार) कर दिया जाएगा।
जांच में हुई पुष्टि
सामाजिक बहिष्कार की धमकी और अवैध उगाही के दबाव से परेशान होकर पीड़ित रसपाल सिदार ने उच्च अधिकारियों से शिकायत की। जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय के निर्देश पर पिथौरा एसडीओपी (अनुविभागीय अधिकारी पुलिस) ने मामले की जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने:
पीड़ित रसपाल सिदार,
आरोपी पक्ष (कार्तिक राम, जयचंद और लक्ष्मण),
और गांव के गवाहों (सुशील डड़सेना, ग्राम कोटवार श्रीमती सदमा नंद, निरंजन बिसाल और रतिराम नेटी) के बयान दर्ज किए।
गवाहों और बयानों के आधार पर पुलिस जांच में आरोपियों द्वारा की गई अवैध वसूली की मांग और सामाजिक बहिष्कार की धमकी की पुष्टि हुई।
इन गंभीर धाराओं में केस दर्ज
एसडीओपी पिथौरा के जांच प्रतिवेदन और दिए गए निर्देशों के आधार पर सांकरा थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है:
भारतीय न्याय संहिता (BNS): धारा 308(3)और 3(5)
नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955: धारा 7(2)
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में वैधानिक धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई तेजी से की जा रही है। समाज के नाम पर इस तरह का दबाव और प्रताड़ना पूरी तरह से गैर-कानूनी है।