Mahatari Vandan Yojana: महतारी वंदन योजना के तहत लाभ ले रहीं महिलाओं की पात्रता जांच में 542 हितग्राही अपात्र पाई गई हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग की जांच में सामने आए इन मामलों के बाद विभाग ने संबंधित हितग्राहियों से करीब 30 लाख रुपए की राशि वापस वसूल की है। अधिकारियों के अनुसार योजना में सत्यापन और वसूली की प्रक्रिया अभी भी जारी है।
महतारी वंदन योजना के अंतर्गत पात्र विवाहित, विधवा और तलाकशुदा महिलाओं को सरकार की ओर से हर महीने 1 हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जाती है।
शिकायतों के बाद शुरू हुई पात्रता जांच
योजना में कुछ अपात्र लोगों के लाभ लेने की शिकायतें मिलने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने हितग्राहियों का सत्यापन शुरू किया। जांच के दौरान 4 लाख 17 हजार 902 लाभार्थियों में से 542 महिलाएं निर्धारित पात्रता नियमों पर खरी नहीं उतरीं। विभाग ने ऐसे हितग्राहियों से योजना के तहत मिली राशि की रिकवरी शुरू की, जिसमें अब तक करीब 30 लाख रुपए की वसूली की जा चुकी है।
मृत हितग्राहियों से राशि वसूली
जांच के दौरान कुछ ऐसे मामले भी सामने आए, जिनमें योजना का लाभ लेने वाली महिलाओं की मृत्यु हो चुकी थी, लेकिन इसके बाद भी उनके बैंक खातों से योजना की राशि निकाली गई। ऐसे मामलों में विभाग ने संबंधित उत्तराधिकारियों से राशि वापस ली है। अधिकारियों के मुताबिक, मृत हितग्राहियों से जुड़े मामलों में अब तक 7 लाख 60 हजार रुपए की वसूली की जा चुकी है।
98.58 प्रतिशत हितग्राहियों का सत्यापन पूरा
महतारी वंदन योजना में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए केवाईसी प्रक्रिया को भी अनिवार्य किया गया है। बिलासपुर जिले में कुल 4,17,902 हितग्राहियों में से 4,11,989 महिलाओं की केवाईसी पूरी हो चुकी है। इस तरह जिले में अब तक 98.58 प्रतिशत लाभार्थियों का सत्यापन पूरा किया जा चुका है। शेष हितग्राहियों की केवाईसी और पात्रता जांच की प्रक्रिया जारी है।
31 किश्तों में खाते में पहुंची 12 अरब से ज्यादा राशि
महतारी वंदन योजना के तहत अब तक 31 किश्त जारी की जा चुकी हैं। इन किश्तों के माध्यम से करीब 12.16 अरब रुपए की राशि हितग्राहियों के बैंक खातों में भेजी गई है। विभाग का कहना है कि बाकी बचे हितग्राहियों के सत्यापन के बाद अपात्र लाभार्थियों की संख्या में और बदलाव हो सकता है। अधिकारियों ने बताया कि योजना का लाभ केवल पात्र महिलाओं तक पहुंचाने के लिए नियमित जांच की जा रही है।

