CGPSC Scam: पूर्व CM भूपेश बघेल के OSD रहे चेतन बोरघरिया गिरफ्तार, ED जांच में 66 लाख से ज्यादा कैश ट्रांजेक्शन का खुलासा
CGPSC Scam मामले में ED ने पूर्व CM भूपेश बघेल के OSD रहे चेतन बोरघरिया को गिरफ्तार किया है। जांच में 66.64 लाख रुपये के कैश ट्रांजेक्शन और पेपर लीक से जुड़े कई खुलासे सामने आए हैं।
CGPSC Scam: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के तत्कालीन ओएसडी (OSD) और वर्तमान में बलरामपुर-रामानुजगंज के अतिरिक्त कलेक्टर चेतन बोरघरिया को गिरफ्तार कर लिया है। PMLA की धारा 19 के तहत यह गिरफ्तारी 11 सितंबर 2026 को की गई। जांच एजेंसी द्वारा की गई पूछताछ और फॉरेंसिक पड़ताल में इस घोटाले से जुड़े कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।
ED के अनुसार, चेतन बोरघरिया के बैंक खाते में 170 अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए करीब 66.64 लाख रुपये कैश जमा कराए गए थे।
अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र
जांच में चेतन बोरघरिया और मामले के अन्य आरोपी उत्कर्ष चंद्राकर के बीच कई संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के प्रमाण भी मिले हैं। जब्त डिजिटल डिवाइस की फॉरेंसिक जांच से बोरघरिया और उत्कर्ष के बीच बातचीत की पुष्टि हुई है, जिसमें पैसों के लेन-देन, भुगतान की मांग और रकम वापसी से जुड़ी चर्चाएं शामिल हैं। इसके अलावा, पैसों की लेयरिंग (फंड घुमाने) के लिए M/s Figurecave E-Com (OPC) Private Limited नामक कंपनी के इस्तेमाल का भी संदेह है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक,
CGPSC राज्य सेवा परीक्षा 2021 के दौरान अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र मुहैया कराए गए थे।
प्रिलिम्स परीक्षा: रायपुर स्थित 'सिद्धि विनायक मैरिज पैलेस' में अभ्यर्थियों को लीक प्रश्नपत्र बांटे गए।
मुख्य परीक्षा: अभ्यर्थियों को बरनवापारा अभयारण्य के एक रिसॉर्ट में ठहराया गया और लीक पेपर के आधार पर कोचिंग दी गई।
रसूखदार परिवारों को किया गया चयनित
आरोप है कि उत्कर्ष चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने मिलकर अभ्यर्थियों से करीब 3 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध रकम जुटाई। उम्मीदवारों को तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में रसूख और OSD चेतन बोरघरिया के आधिकारिक पद का डर व प्रभाव दिखाकर चयन की गारंटी दी गई थी। यह पूरा मामला साल 2020 से 2022 के बीच आयोजित की गई भर्ती प्रक्रियाओं में हुई अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि नियमों और पारदर्शिता को ताक पर रखकर राजनीतिक व प्रशासनिक रसूखदार परिवारों के बच्चों को डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य उच्च राजपत्रित पदों पर चयनित कराया गया, जबकि योग्य अभ्यर्थियों की अनदेखी की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने इसकी जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी थी।
अब तक क्या-क्या हुआ?
CBI की कार्रवाई: सीबीआई ने छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेज जब्त किए और पूर्व सीजीपीएससी अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, उप परीक्षा नियंत्रक, एक निजी व्यक्ति और 4 चयनित अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया।
ED की जांच: मनी लॉन्ड्रिंग और कैश सिंडिकेट की जांच कर रही ED ने करीब 30 लोगों को नोटिस जारी कर पूछताछ की है। इनमें विवादित अभ्यर्थियों के अलावा एनजीओ, रिसॉर्ट संचालक और बड़ी कंपनियां शामिल हैं।
फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि वसूली गई करोड़ों की यह काली कमाई कहां-कहां खपाई गई और इसमें कौन-कौन से बड़े चेहरे शामिल हैं।