सरगुजा जिले के मैनपाट स्थित कुनिया ग्राम पंचायत के जंगल पारा में पेयजल संकट गंभीर हो गया है। यहां रहने वाले लोगों को पीने के लिए साफ पानी तक उपलब्ध नहीं है। ग्रामीण मजबूरी में नाले के किनारे अस्थायी रूप से बनाए गए छोटे जल स्रोत का पानी उपयोग कर रहे हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहा है।
ग्रामीणों की सबसे बड़ी समस्या पानी तक पहुंच की है। महिलाओं को घर से निकलकर खेत किनारे बहने वाले नाले तक जाना पड़ता है, जहां 20 फीट गहरी खाई में उतरकर पानी भरना पड़ता है। कई बार फिसलन और जोखिम के बावजूद उन्हें यह काम करना पड़ता है क्योंकि दूसरा कोई विकल्प नहीं है।
ग्रामीण महिलाओं को दिन में मजदूरी करने के बाद शाम को लौटकर पानी लाने जाना पड़ता है। अंधेरा हो जाने पर भी वे मजबूरी में नाले तक पहुंचती हैं। उनका कहना है कि दिन में काम और रात में पानी की जद्दोजहद ने जीवन को बेहद कठिन बना दिया है।
बारिश के दिनों में और बढ़ जाती है परेशानी
स्थानीय महिलाओं के अनुसार बरसात के मौसम में स्थिति और खराब हो जाती है। बारिश के दौरान नाले का जलस्तर बढ़ जाने से अस्थायी जल स्रोत भी पूरी तरह डूब जाता है, जिससे पीने के पानी का संकट और गहरा जाता है। पेयजल की कमी और दूषित पानी के उपयोग के कारण ग्रामीणों में बीमारियां फैल रही हैं। खासकर बच्चे इस गंदे पानी को पीकर बीमार हो रहे हैं। वहीं साफ पानी की कमी से लोग नियमित स्नान भी नहीं कर पा रहे हैं, जिससे त्वचा संबंधी रोगों के मामले बढ़ रहे हैं।बोरवेल की मांग, स्थायी समाधान की उम्मीद
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में तत्काल बोरवेल की व्यवस्था की जानी चाहिए। स्थानीय विधायक रामकुमार टोप्पो द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में बोरवेल लगवाकर पेयजल उपलब्ध कराने की पहल की जा रही है, जिससे कई गांवों को राहत मिली है। जंगल पारा के लोगों की मांग है कि यहां भी बोरवेल लगाया जाए, जिससे 10 से 15 परिवारों को सीधे लाभ मिलेगा और उन्हें दूषित पानी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते स्थायी पेयजल व्यवस्था नहीं की गई तो स्वास्थ्य संकट और गहरा सकता है।





