कोतरारोड़ पुलिस ने ट्रेलर वाहन को किराये पर लेकर उसे अवैध रूप से बेच देने वाले एक शातिर ठग को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। आरोपी ने फर्जी पहचान, नकली किरायानामा और ब्लैंक चेक का इस्तेमाल कर वाहन मालिक के साथ लाखों रुपये की धोखाधड़ी की थी। मामले में उसका एक साथी अभी फरार है, जिसकी तलाश जारी है।
गोरखा निवासी हरदीप सिंह ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि वर्ष 2024 में एक व्यक्ति ने खुद को “राकेश डनसेना” बताकर उसका ट्रेलर वाहन किराये पर लिया था। दोनों के बीच 80 हजार रुपये मासिक किराया तय हुआ था और 7 नवंबर 2024 को विधिवत किरायानामा भी तैयार किया गया था। भरोसा कायम करने के लिए आरोपी ने एचडीएफसी बैंक का हस्ताक्षरयुक्त ब्लैंक चेक भी दिया था।
किराया बंद होने के बाद संदिग्ध गतिविधि शुरू
कुछ दिनों तक सब सामान्य रहा, लेकिन बाद में आरोपी का मोबाइल बंद हो गया। इसके बाद न तो वाहन मालिक को किराया मिला और न ही ट्रेलर वाहन वापस किया गया। संदेह होने पर पीड़ित ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि खुद को राकेश डनसेना बताने वाला व्यक्ति असल में ग्राम गहलोई, थाना पुसौर निवासी सुदामा प्रधान उर्फ छोटू है। इसके बाद थाना कोतरारोड़ में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर विस्तृत विवेचना शुरू की गई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देश पर थाना प्रभारी निरीक्षक शील आदित्य सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने आरोपी की तलाश तेज की। कोतरारोड़ और कोतवाली पुलिस की संयुक्त टीम ने मुखबिर की सूचना पर आरोपी को पकड़कर हिरासत में लिया और पूछताछ की।साथी के साथ मिलकर बनाई थी ठगी की योजना
पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने अपने साथी गुरप्रीत सिंह के साथ मिलकर यह पूरी साजिश रची थी। गुरप्रीत ने वाहन मालिक को एनटीपीसी लारा में काम दिलाने का झांसा दिया, जबकि सुदामा प्रधान ने फर्जी पहचान बनाकर किराये का सौदा पूरा किया। दोनों आरोपियों ने मिलकर ट्रेलर वाहन क्रमांक CG 15 AC 4476 को रायपुर ले जाकर गुढ़ियारी क्षेत्र में हार्स और ट्राला सहित 5 लाख 20 हजार रुपये में बेच दिया। बिक्री से प्राप्त रकम को दोनों ने आपस में बांट लिया। पुलिस को जानकारी मिली है कि वाहन को बाद में काटकर कबाड़ में बदल दिया गया।
पुराने अपराधों में भी संलिप्तता की आशंका
आरोपी ने पूछताछ में वाहन चोरी और मोबाइल चोरी की कुछ पुरानी घटनाओं में भी शामिल होने की बात स्वीकार की है, जिसकी पुलिस अलग से जांच कर रही है। इससे आरोपी के आपराधिक नेटवर्क की भी जांच की जा रही है। पुलिस के अनुसार मामले में फरार सह-आरोपी गुरप्रीत सिंह की तलाश लगातार जारी है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने कहा कि फर्जी दस्तावेज और धोखाधड़ी के जरिए लोगों की मेहनत की कमाई हड़पने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
