उद्योगपति अनिल अंबानी की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। उनके नेतृत्व वाले रिलायंस ग्रुप पर जांच एजेंसियों का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी (ED) ने पिछले शुक्रवार को मुंबई से अनिल अंबानी के बेहद करीबी और रिलायंस ग्रुप के पूर्व ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर सतीश सेठ को गिरफ्तार किया था। मुंबई की स्थानीय अदालत से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद जांच टीम उन्हें दिल्ली लेकर आई है। दिल्ली की द्वारका कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सतीश सेठ को छह दिनों के लिए ईडी की कस्टडी यानी रिमांड पर भेज दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले में रिलायंस ग्रुप के दो पूर्व अधिकारियों को धन शोधन निवारण अधिनियम यानी पीएमएलए (PMLA) के तहत पकड़ा गया है।
फर्जी बिल बनाकर हवाला के जरिए विदेश भेजे पैसे
अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद कहा कि इस पूरे घपले के पीछे छिपे असली चेहरों और पैसों के लेनदेन का पता लगाने के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ करना बेहद जरूरी है। सतीश सेठ पर आरोप है कि उन्होंने हीरों का आयात यानी डायमंड इंपोर्ट करने के नाम पर उनकी कीमत बहुत ज्यादा दिखाकर फर्जी बिल तैयार किए। इसके बाद इन फर्जी कागजातों की आड़ में हवाला के जरिए करोड़ों रुपये गैरकानूनी तरीके से विदेश भेजे गए. हवाला एक ऐसा अवैध माध्यम होता है जिसमें बिना किसी सरकारी कागजात या टैक्स दिए, चोरी-छिपे मोटी रकम को एक देश से दूसरे देश में ट्रांसफर किया जाता है। सतीश सेठ को लंबे समय तक अनिल अंबानी का सबसे भरोसेमंद सहयोगी माना जाता रहा है। वे रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के वाइस-चेयरमैन का पद भी संभाल चुके हैं।सरकारी प्रोजेक्ट्स के पैसों में हेराफेरी, शेल कंपनियों का हुआ इस्तेमाल
ईडी की जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है. जांच एजेंसी के अनुसार, इस पूरे वित्तीय धोखाधड़ी यानी फाइनेंशियल फ्रॉड का सबसे बड़ा फायदा अनिल अंबानी की रिलायंस कंपनी को मिला है। आरोप है कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई (NHAI) के दो बड़े सड़क निर्माण प्रोजेक्ट्स (जयपुर-रींगस टोल रोड और त्रिची-करूर टोल रोड) के लिए जारी किए गए सरकारी और सार्वजनिक फंड को एक सोची-समझी रणनीति के तहत विदेश भेजा गया। इस काम के लिए रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया। शेल कंपनियां कागजों पर बनी ऐसी फर्जी कंपनियां होती हैं जिनका असल में कोई दफ्तर या बिजनेस नहीं होता, बल्कि इनका इस्तेमाल केवल काले धन को सफेद करने और टैक्स चोरी के लिए किया जाता है। जांच में सामने आया है कि इस रास्ते से करीब 92 करोड़ रुपये विदेश भेजे गए।
सीबीआई की एफआईआर के बाद शुरू हुई थी ईडी की जांच
इस पूरे मामले की शुरुआत मार्च 2026 में हुई थी, जब केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई (CBI) ने सतीश सेठ और गौतम दोशी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था। केस दर्ज करने के बाद सीबीआई ने दोनों अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी भी की थी। सीबीआई की इसी मुख्य शिकायत को आधार बनाकर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग यानी अवैध रूप से कमाए धन को वैध दिखाने के मामले के तहत अपनी जांच तेज की और यह गिरफ्तारी की।शेयर बाजार पर दिख सकता है असर
अनिल अंबानी की कंपनियों पर जांच एजेंसियों की इस कड़ी कार्रवाई का सीधा असर सोमवार को शेयर बाजार खुलने पर देखने को मिल सकता है। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन रिलायंस इंफ्रा और रिलायंस पावर के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है। हालांकि पिछले शुक्रवार को बाजार बंद होने तक रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर का शेयर लगभग पांच फीसदी की बढ़त के साथ 85.84 रुपये पर और रिलायंस पावर का शेयर तीन फीसदी से ज्यादा की तेजी के साथ 26.59 रुपये के स्तर पर बंद हुआ था, लेकिन अब इस नई गिरफ्तारी और छह दिन की रिमांड की खबर के बाद निवेशक फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं।
