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इथेनॉल से दौड़ेंगे वाहन
इथेनॉल से दौड़ेंगे वाहन
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ग्रीन मोबिलिटी क्रांति : देश में अब 100% इथेनॉल (E100) से दौड़ेंगे वाहन, गडकरी ने दी कानूनी मंजूरी

भारत ने वैकल्पिक और हरित ईंधन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए E100 (100 प्रतिशत इथेनॉल आधारित) ईंधन से चलने वाले वाहनों को कानूनी मान्यता दे दी है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari ने घोषणा की कि E100 वाहनों के नियमों को मंजूरी देने वाली फाइल पर हस्ताक्षर कर दिए गए हैं। इसके बाद देश में पूरी तरह इथेनॉल आधारित वाहनों के व्यावसायिक उपयोग का रास्ता साफ हो गया है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 14 Jun 2026, 04:07 PM · अपडेट: 02 Oct 2026, 09:35 AM
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

भारत में पर्यावरण-अनुकूल और सस्ते ईंधन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक अध्याय की शुरुआत हो चुकी है। देश में वैकल्पिक ईंधन (Alternative Fuel) को बढ़ावा देने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने 100 प्रतिशत इथेनॉल आधारित ईंधन (E100) से चलने वाले वाहनों के नियमों को आधिकारिक मंजूरी दे दी है।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की है कि उन्होंने E100 वाहनों को कानूनी मान्यता देने वाली महत्वपूर्ण फाइल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसके साथ ही, अब भारतीय सड़कों पर पूरी तरह से इथेनॉल पर चलने वाले वाहनों का रास्ता साफ हो गया है।

मुख्य हाइलाइट्स: एक नजर में

  • ऐतिहासिक फैसला: E100 ईंधन और वाहनों के व्यावसायिक इस्तेमाल को मिली कानूनी हरी झंडी।

  • 2 महीने की डेडलाइन: अगले दो महीनों के भीतर कई प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियां 100% इथेनॉल से चलने वाली कार और टू-व्हीलर्स बाजार में उतारेंगी।

  • किसानों को सीधा फायदा: गन्ने, मक्के और कृषि अवशेषों से बनने वाले इथेनॉल से देश के अन्नदाता अब 'ऊर्जादाता' बनेंगे।

  • आयात पर लगाम: भारत के कच्चे तेल (Crude Oil) के भारी-भरकम आयात बिल में आएगी बड़ी कमी।

गडकरी का सपना हुआ साकार

नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में बेहद उत्साहित दिख रहे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा:

"मुझे यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि मैंने 100 प्रतिशत इथेनॉल के कानूनी उपयोग को मंजूरी देने वाली फाइल पर साइन कर दिए हैं। इथेनॉल को पेट्रोल का प्रभावी और सस्ता विकल्प बनाने का मेरा लंबे समय का सपना अब हकीकत में बदल रहा है।"

नितिन गडकरी ने यह भी साझा किया कि एक प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनी द्वारा पहले ही 100% इथेनॉल से चलने वाले वाहन का सफल लॉन्च (फ्लेक्स-फ्यूल प्रोटोटाइप) किया जा चुका है। सरकार के इस नीतिगत फैसले के बाद अब टायोटा, मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स, टीवीएस और बजाज जैसी दिग्गज कंपनियां अपने फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल्स को तेजी से बाजार में लॉन्च करने की तैयारी में हैं।

आखिर क्या है E100 ईंधन और यह कैसे काम करता है?

E100 (Ethanol 100) एक ऐसा अत्याधुनिक ईंधन है जिसमें लगभग पूरी मात्रा इथेनॉल की होती है।

  • कंपोजीशन: तकनीकी रूप से इसमें लगभग 93 से 95 प्रतिशत तक शुद्ध इथेनॉल होता है।

  • पेट्रोल का मिश्रण क्यों?: इसमें 5 से 7 प्रतिशत की मामूली मात्रा में पेट्रोल या अन्य विशेष एडिटिव्स मिलाए जाते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि बेहद ठंडे मौसम में भी वाहन को स्टार्ट करने में कोई तकनीकी दिक्कत न आए और इंजन सुचारू रूप से काम करे।

E20 से E100 तक का सफर: भारत की बड़ी छलांग

भारत ने बहुत ही कम समय में ईंधन सम्मिश्रण (Fuel Blending) के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी धाक जमाई है:

चरणइथेनॉल मिश्रण की मात्रावर्तमान स्थिति / लक्ष्य
E10 (शुरुआती चरण)10% इथेनॉल + 90% पेट्रोलसफलतापूर्वक पूरे देश में लागू
E20 (वर्तमान चरण)20% इथेनॉल + 80% पेट्रोलदेश के अधिकांश हिस्सों में उपलब्धता हासिल
E85 (प्रगति पर)85% इथेनॉल + 15% पेट्रोलफ्लेक्स-फ्यूल इंजनों के लिए टेस्टिंग जारी
E100 (भविष्य/नया नियम)93-95% इथेनॉल + पेट्रोल मिश्रणकानूनी मंजूरी मिली; व्यावसायिक लॉन्च जल्द

सरकार ने इसके लिए केंद्रीय मोटर वाहन नियमों (CMVR) में आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया को पूरा कर लिया है, जिससे कंपनियों के लिए इन वाहनों का बड़े पैमाने पर उत्पादन करना आसान हो गया है।

अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को होने वाले 3 बड़े फायदे

1. कच्चे तेल के आयात बिल में भारी कटौती

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, जिस पर हर साल अरबों डॉलर खर्च होते हैं। E100 ईंधन के आने से इस निर्भरता में भारी कमी आएगी और देश का पैसा देश में ही रहेगा।

2. प्रदूषण से मुक्ति (नेट-जीरो का लक्ष्य)

फॉसिल फ्यूल (पेट्रोल-डीजल) के मुकाबले इथेनॉल एक स्वच्छ ईंधन है। इसके जलने से कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन और ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन बेहद कम होता है, जिससे शहरों को जहरीले धुएं से मुक्ति मिलेगी।

3. ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की चांदी

इथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने के रस, शीरे (Molasses), खराब अनाज (जैसे मक्का और चावल) और कृषि अपशिष्ट से किया जाता है। इससे न केवल बायो-फ्यूल रिफाइनरियों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि किसानों को उनकी फसलों की बेहतर और अतिरिक्त कीमत मिल सकेगी।

आगे की राह: क्या पेट्रोल से सस्ता होगा सफर?

विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि इथेनॉल का उत्पादन घरेलू स्तर पर होगा, इसलिए इसकी कीमतें पेट्रोल के मुकाबले काफी कम (लगभग 60-70 रुपये प्रति लीटर के आसपास) रह सकती हैं। हालांकि, इथेनॉल की कम कैलोरीफिक वैल्यू के कारण माइलेज में थोड़ी कमी आ सकती है, लेकिन ईंधन की कम कीमत और पर्यावरण को होने वाले फायदे इसकी भरपाई कर देंगे।

सरकार का अगला कदम देश भर के चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर E100 फ्यूल डिस्पेंसिंग स्टेशन (इथेनॉल पंप) के नेटवर्क को तेजी से फैलाना है, ताकि आम उपभोक्ताओं को इसे अपनाने में कोई परेशानी न हो।

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