$2.1$ ट्रिलियन डॉलर के साथ स्पेसएक्स बनी दुनिया की 7वीं सबसे मूल्यवान कंपनी
आईपीओ प्राइस: $135 डॉलर * लिस्टिंग प्राइस: यह करीब 11% प्रीमियम के साथ $150 डॉलर पर लिस्ट हुआ।
इंट्राडे हाई: ट्रेडिंग के दौरान निवेशकों के भारी उत्साह के चलते यह 30% से अधिक उछलकर $176.52 डॉलर के ऑल-टाइम हाई पर पहुँच गया था।
क्लोजिंग प्राइस: मुनाफावसूली के बाद भी दिन के अंत में यह करीब 19% की शानदार बढ़त के साथ $160.95 डॉलर पर बंद हुआ।
भारतीय निवेशक स्पेसएक्स में कैसे करें निवेश
भारतीय शेयर बाजारों (BSE या NSE) के जरिए सीधे स्पेसएक्स के शेयर नहीं खरीदे जा सकते, लेकिन अमेरिकी बाजारों में निवेश करना अब बेहद आसान हो चुका है। भारतीय निवेशकों के पास इसके दो सबसे मुख्य रास्ते हैं:
1. इंटरनेशनल ब्रोकरेज ऐप्स के जरिए
भारत में कई विश्वसनीय फिनटेक ऐप्स मौजूद हैं जो अमेरिकी बाजारों में निवेश की सुविधा देती हैं (जैसे- INDmoney, Groww, Appreciate आदि)।
स्टेप 1: इनमें से अपनी पसंदीदा ऐप डाउनलोड करें और PAN कार्ड, पहचान पत्र (KYC दस्तावेजों) व बैंक अकाउंट की मदद से अपना इंटरनेशनल ट्रेडिंग अकाउंट सेटअप करें।
स्टेप 2: अपने भारतीय बैंक खाते से ऐप के वॉलेट में फंड ऐड करें। ऐप के भीतर ही इस राशि को भारतीय रुपये (INR) से अमेरिकी डॉलर (USD) में बदलें।
स्टेप 3: फंड एक्टिव होते ही सर्च बार में स्पेसएक्स (टिकर सिंबल: SPCX) सर्च करें।
स्टेप 4 फ्रैक्शनल इन्वेस्टिंग: यदि आपको एक पूरा शेयर महंगा लगता है, तो आप फ्रेक्शनल शेयर्स (क्रिप्टोकरेंसी की तरह एक शेयर का छोटा सा हिस्सा, जैसे $10 या $50 मूल्य का) भी खरीद सकते हैं।
GIFT City (गुजरात) के जरिए निवेश
आप गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (GIFT City) के अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंजों के माध्यम से भी अमेरिकी कंपनियों के शेयर खरीद सकते हैं।
स्टेप 1: गिफ्ट सिटी के साथ रजिस्टर्ड किसी ऐसे ब्रोकर के पास अकाउंट खोलें जिसके पास अमेरिकी लिस्टेड स्टॉक्स का एक्सेस हो।
स्टेप 2: अपने जरूरी वित्तीय और पहचान दस्तावेज (PAN, एड्रेस प्रूफ, बैंक डिटेल्स) जमा कर अपनी कॉर्पोरेट या व्यक्तिगत केवाईसी पूरी करें।
स्टेप 3: निर्धारित बैंकिंग चैनलों के जरिए अपने गिफ्ट सिटी इन्वेस्टमेंट अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करें।
स्टेप 4: स्पेसएक्स के सिंबल को सर्च कर अपनी क्षमता अनुसार ऑर्डर प्लेस करें।
निवेश करने से पहले इन 'रेड सिग्नल्स' और नियमों को जान लें
विदेशी बाजारों में निवेश करने का उत्साह अच्छा है, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और आयकर विभाग के नियमों को समझना बेहद जरूरी है:
LRS की सीमा: भारत से विदेशी शेयरों में निवेश आरबीआई की लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत आता है। इसके तहत एक भारतीय नागरिक एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 2,50,000 अमेरिकी डॉलर (करीब ₹2 करोड़ से अधिक) ही विदेश भेज सकता है।
TCS (टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स): एक तय सीमा (वर्तमान में ₹7 लाख) से अधिक विदेशी रेमिटेंस भेजने पर सरकार नियमों के अनुसार टीसीएस वसूलती है, जिसे आप बाद में आईटीआर (ITR) दाखिल करते समय क्लेम कर सकते हैं।
कैपिटल गेन्स टैक्स: अमेरिकी शेयरों को बेचने पर होने वाले मुनाफे पर भारत में आपके होल्डिंग पीरियड के आधार पर शॉर्ट-टर्म या लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स देना होगा।
विदेशी बाजारों और एयरोस्पेस सेक्टर में निवेश के अपने जोखिम होते हैं। किसी भी बड़े निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से चर्चा जरूर करें।
