Meghalaya Uranium Mining: मेघालय विधानसभा ने राज्य में यूरेनियम की खोज, खनन और अयस्क की प्रोसेसिंग का विरोध करते हुए सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया है। विधानसभा ने केंद्र सरकार के खान मंत्रालय और परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) से मेघालय में यूरेनियम से जुड़ी किसी भी गतिविधि को अनुमति नहीं देने और आगे नहीं बढ़ाने की मांग की है। इस विरोध की सबसे बड़ी वजह पर्यावरण और जल स्रोतों पर संभावित असर है। मेघालय के डोमियासियाट-मावथाबाह क्षेत्र में यूरेनियम के बड़े संसाधन मौजूद हैं
मेघालय का यूरेनियम भंडार
इस क्षेत्र की जल प्रणालियां आगे असम और बांग्लादेश की ओर जाती हैं, इसलिए प्रदूषण का असर बड़े इलाके तक पहुंचने की चिंता है। मेघालय में यूरेनियम का कितना भंडार? मेघालय के दक्षिण-पश्चिम खासी हिल्स और पश्चिम खासी हिल्स क्षेत्र में महत्वपूर्ण यूरेनियम संसाधन मौजूद हैं। डोमियासियाट, मावथाबाह और किल्लेन्ग-पिन्डेन्गसोहियोंग-मावथाबाह (KPM) क्षेत्र यूरेनियम संसाधनों के लिए प्रमुख माने जाते हैं। राज्य में अनुमानित 9.22 मिलियन टन यूरेनियम संसाधन बताए जाते हैं। इसी वजह से मेघालय देश के प्रमुख यूरेनियम क्षेत्रों में शामिल है।
यूरेनियम से परमाणु ईंधन
इसका रासायनिक संकेत U और परमाणु क्रमांक 92 है। प्राकृतिक यूरेनियम में मुख्य रूप से तीन आइसोटोप पाए जाते हैं— U-238: प्राकृतिक यूरेनियम का करीब 99.27 प्रतिशत U-235: करीब 0.72 प्रतिशत, जो विखंडन-योग्य आइसोटोप है U-234: बेहद कम मात्रा में पाया जाता है यूरेनियम से परमाणु ईंधन कैसे बनता है? यूरेनियम अयस्क को खदान से निकालने के बाद कुचला जाता है और रासायनिक प्रक्रिया के जरिए यूरेनियम को अलग किया जाता है। इस प्रक्रिया से येलोकेक (U₃O₈) तैयार होता है। इसके बाद इसे आगे की प्रक्रियाओं से गुजारकर परमाणु रिएक्टरों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन के लिए तैयार किया जाता है।
मेघालय में यूरेनियम खनन का विरोध क्यों?
देश के पहले चरण के प्रेशराइज्ड हेवी वॉटर रिएक्टर (PHWR) में प्राकृतिक यूरेनियम का इस्तेमाल ईंधन के तौर पर किया जाता है। इन रिएक्टरों से बिजली उत्पादन के साथ आगे के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए जरूरी प्लूटोनियम भी प्राप्त किया जा सकता है। इसलिए घरेलू यूरेनियम संसाधन भारत की परमाणु ऊर्जा और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। यूरेनियम खनन का विरोध क्यों? मेघालय में विरोध की मुख्य वजह खनन से जुड़े संभावित पर्यावरणीय और स्वास्थ्य जोखिम हैं। इनमें रेडियोधर्मी पदार्थों का रिसाव, रेडॉन गैस, खनन अपशिष्ट और जल प्रदूषण जैसी चिंताएं शामिल हैं।
1980 से यूरेनियम का विरोध
1980 के दशक से जारी है विरोध मेघालय में यूरेनियम खनन का विरोध नया नहीं है। इसकी शुरुआत 1980 के दशक में हुई थी, जब एटॉमिक मिनरल्स डायरेक्टरेट फॉर एक्सप्लोरेशन एंड रिसर्च (AMD) ने यूरेनियम से समृद्ध इलाकों में खोज का काम शुरू किया था। डोमियासियाट और आसपास के क्षेत्रों में इसके बाद से ही यूरेनियम खनन को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध होता रहा है। भारत के सामने चुनौती क्या है? एक तरफ भारत को परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के लिए यूरेनियम की जरूरत है, वहीं दूसरी तरफ मेघालय में स्थानीय समुदाय पर्यावरण, जल स्रोतों और जमीन के अधिकारों को लेकर चिंतित हैं।

