Chhattisgarh Government Schools: बुनियादी सुविधाओं की कमी पर सियासत तेज, सीजेपी ने सीएम को पत्र भेजकर उठाईं 3 बड़ी मांगें
Chhattisgarh Government Schools: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में शिक्षकों की कमी और स्कूलों की अव्यवस्थाओं को लेकर छात्रों के प्रदर्शन के बाद सियासत तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी ने सरकार से खाली पदों पर स्थायी भर्ती समेत तीन प्रमुख मांगें रखी हैं।
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कीर्तिमान न्यूज
30 Aug 2026, 03:24 PM
दुर्ग
Chhattisgarh Government Schools: सरकारी स्कूलों की बदहाल तस्वीर और शिक्षकों की कमी को लेकर अब राजनीति भी गरमाने लगी है। देशभर में 'स्कूल ठीक करो अभियान' चला रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अब छत्तीसगढ़ के सरकारी तंत्र पर सवाल खड़े किए हैं। राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में स्कूलों का जायजा लेने के बाद पार्टी के नेता अब छत्तीसगढ़ की जमीनी हकीकत उजागर करने में जुटे हैं। यह पूरा मामला हाल ही में छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से सामने आया, जहां पेंड्रावन और सेलूद के स्कूली बच्चे खुद सड़कों पर उतर आए थे।
स्कूलों में फैली अव्यवस्थाओं को दूर करने की मांग
खराब रास्ते, मूलभूत सुविधाओं की कमी और सबसे बढ़कर शिक्षकों की कमी से परेशान छात्रों ने उग्र प्रदर्शन किया था। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हड़कंप मच गया, जिसके तुरंत बाद सीजेपी भी हरकत में आ गई। वीडियो सामने आने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता महेंद्र भारद्वाज ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, राज्य के शिक्षा मंत्री और शिक्षा सचिव को एक पत्र भेजा है। पत्र के जरिए उन्होंने न केवल पेंड्रावन स्कूल की दुर्दशा पर ध्यान आकर्षित किया, बल्कि पूरे प्रदेश के सरकारी स्कूलों में फैली अव्यवस्थाओं को दूर करने की मांग की है।
स्थायी शिक्षकों की तैनाती: पेंड्रावन के आत्मानंद स्कूल में खाली पड़े सभी 17 पदों पर स्थायी शिक्षकों की तत्काल नियुक्ति की जाए। कामचलाऊ (अटैचमेंट) व्यवस्था को बंद कर बच्चों की सभी जायज मांगें जल्द से जल्द पूरी की जाएं।
पारदर्शी भर्ती और सम्मानजनक मानदेय: अगले 10 दिनों के भीतर प्रदेश के सभी स्कूलों के खाली पदों का ब्योरा (संभाग, जिला, स्कूल और विषयवार) सार्वजनिक किया जाए और भर्ती प्रक्रिया शुरू हो। साथ ही, संविदा पर काम कर रहे शिक्षकों को सम्मानजनक मानदेय मिले, ताकि आर्थिक तंगी के कारण उन्हें बार-बार आंदोलन का रास्ता न चुनना पड़े।
सत्र शुरू होने से पहले हो भर्ती: नए शिक्षण सत्र की शुरुआत से पहले ही सभी रिक्त पदों को भरा जाए, ताकि सत्र शुरू होते ही बच्चों की पढ़ाई बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से चल सके।
पार्टी ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने इन मांगों पर जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो इस अभियान को प्रदेश स्तर पर और तेज किया जाएगा।