Mid Day Meal Chhattisgarh: तीन महीने से मानदेय न मिलने से रसोइयों में भारी आक्रोश, 28 तक भुगतान न होने पर पूर्ण हड़ताल का ऐलान
Mid Day Meal Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में मध्याह्न भोजन योजना से जुड़ी रसोइया बहनों और स्वयं सहायता समूह संचालकों को पिछले तीन महीनों से मानदेय और भोजन सामग्री का बजट नहीं मिला है। बजट आवंटित होने के बावजूद भुगतान लंबित रहने से आर्थिक संकट बढ़ गया है। रसोइया संगठन ने 28 सितंबर तक भुगतान नहीं होने पर जिलेभर के स्कूलों में रसोई बंद कर हड़ताल करने की चेतावनी दी है।
Mid Day Meal Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्कूली बच्चों का पेट भरने वाली मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) रसोइया बहनों और समूह संचालकों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने यानी 16 जून से लेकर अब तक पिछले तीन महीनों का मानदेय और भोजन सामग्री का
बजट रसोइयों व समूहों को नहीं मिला है। प्रशासनिक लापरवाही का आलम यह है कि लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) से 11 सितंबर को ही बजट का आवंटन जारी कर दिया गया था। लेकिन 11 दिन बीत जाने के बाद भी महासमुंद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय द्वारा यह राशि रसोइयों और समूह संचालकों के बैंक खातों में स्थानांतरित नहीं की गई है।
सामग्री खरीदने के पैसे नहीं, रसोइया बहनें आर्थिक तंगी की शिकार
बजट रुकने से मध्याह्न भोजन का संचालन कर रहे स्वयं सहायता समूहों की कमर टूट गई है। संचालकों का कहना है कि जब खातों में पैसे ही नहीं आए हैं, तो वे राशन और अन्य आवश्यक सामग्री कहां से खरीदें? दूसरी ओर, पिछले तीन महीनों से मानदेय न मिलने के कारण रसोइया बहनें भीषण आर्थिक तंगी से गुजर रही हैं और उनके सामने घर चलाना मुश्किल हो रहा है।
28 सितंबर की समयसीमा, फिर ठप होगा चूल्हा
छत्तीसगढ़ मध्याह्न भोजन
रसोइया संगठन की प्रदेश अध्यक्ष नीलू ओगरे ने इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी को सीधे चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि यदि 28 सितंबर (सोमवार) तक सभी रसोइयों और समूह संचालकों के बकाये का भुगतान नहीं किया गया, तो जिले के सभी स्कूलों में रसोई का काम पूरी तरह बंद कर रसोइया हड़ताल पर चले जाएंगे।
महासमुंद जिले में मध्याह्न भोजन की स्थिति:
कुल प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाएं: 1,750
प्रभावित रसोइयों की कुल संख्या: 3,694
रसोइया संगठन की प्रमुख मांगें:
पिछले तीन महीने का रुका हुआ मानदेय तुरंत रसोइयों के खातों में भेजा जाए।
मध्याह्न भोजन सामग्री के बकाये बजट का भुगतान समूह संचालकों को किया जाए।
रसोइयों और संचालकों की आर्थिक समस्याओं का स्थायी समाधान हो।
संगठन की प्रांतीय अध्यक्ष नीलू ओगरे, जिला अध्यक्ष राधा साहू, ब्लॉक अध्यक्ष हसीना पटेल, जिला कोषाध्यक्ष सुमन वैष्णव, जिला सचिव ढलेश निर्मलकर और मीडिया प्रभारी पुष्पा साहू ने जिले की सभी रसोइया बहनों से इस हक की लड़ाई में एकजुट होने की अपील की है। पदाधिकारियों का कहना है कि मेहनत का मानदेय पाना उनका अधिकार है और यदि 28 सितंबर तक मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन ही एकमात्र रास्ता बचेगा।