जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान अपनी दिवंगत माता और स्वयं के खिलाफ इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक भावुक और बड़ा रुख अपनाया है। शुक्रवार देर रात इंस्टाग्राम पर जारी एक वीडियो संदेश में पीएम मोदी ने देश के युवाओं—खासकर जेन-जी (Gen-Z)—से सीधा संवाद साधते हुए साफ कहा कि वह प्रदर्शन में शामिल उन सभी बच्चों को दिल से माफ करते हैं। प्रधानमंत्री ने वीडियो में स्वीकार किया कि जंतर-मंतर पर जो कुछ भी हुआ, उसे पूरे देश ने देखा। उन्होंने कहा कि जिस तरह की शब्दावली का इस्तेमाल किया गया, वह किसी भी सभ्य समाज के संस्कारों से मेल नहीं खाती।
सजा देना नहीं, सही राह दिखाना हमारा फर्ज
"मेरे और मेरी स्वर्गीय माता जी के लिए बेहद आपत्तिजनक बातें कही गईं। लेकिन मैं समझता हूँ कि उम्र के इस दौर में अक्सर बहकावे या गुस्से में गलतियाँ हो जाती हैं। बच्चों को अदालतों के चक्कर कटवाने या समाज में नीचा दिखाने से हालात बेहतर नहीं होंगे। ये गुमराह बच्चे हैं, इन्हें सजा देने के बजाय गले लगाकर सही दिशा में लाना ही हमारा असली दायित्व है।" — नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
युवाओं को बेहतर नागरिक बनने का अवसर
पीएम ने देशवासियों और समाज से भी अपील की कि वे उनकी इस माफी को स्वीकार करें और युवाओं को एक बेहतर नागरिक बनने का अवसर दें। यह पूरा मामला जंतर-मंतर पर छात्रों के उग्र प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान रुचिका सिंह नाम की एक छात्रा का वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुआ था, जिसमें वह प्रधानमंत्री को लेकर अमर्यादित बयान देती दिख रही थीं।
इस वीडियो के सामने आने के बाद:
30 जुलाई को दर्ज हुई प्राथमिकी: गाजियाबाद निवासी स्मृति सिंह की शिकायत पर नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने में मामला दर्ज किया गया।
गंभीर धाराएँ: पुलिस ने मानहानि, सार्वजनिक शांति भंग करने और जानबूझकर अपमान करने जैसी धाराओं के तहत केस दर्ज किया है।
कार्रवाई के बजाय सुधार का संदेश
घटनाक्रम पर भारतीय जनता पार्टी ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि लोकतंत्र में युवाओं की आवाज़ और उनकी भावनाओं का सम्मान होना चाहिए, लेकिन प्रदर्शन की आड़ में पुलिसकर्मियों पर हमला या हिंसा करने वाले आपराधिक तत्वों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। हालांकि, प्रधानमंत्री के इस ताजा संदेश ने पूरे विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है। दंडात्मक कार्रवाई के बजाय 'सुधार और मार्गदर्शन' का संदेश देकर पीएम ने एक बार फिर युवाओं के साथ सीधा भावनात्मक जुड़ाव बनाने की कोशिश की है।