संसद का मानसून सत्र सोमवार को हंगामेदार शुरुआत के साथ शुरू हुआ। पहले ही दिन लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले को लेकर विपक्षी सांसदों ने जोरदार प्रदर्शन और नारेबाजी की। नई दिल्ली स्थित संसद भवन में विपक्ष के इस कड़े रुख के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी और राज्यसभा को दिनभर के लिए बंद कर दिया गया। विपक्षी दल इस गंभीर मुद्दे पर तुरंत चर्चा कराने और जिम्मेदारी तय करने की मांग पर अड़े रहे।संसद की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू होते ही विपक्षी सांसद हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर वेल में आ गए।
हंगामे के चलते लोकसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही को पहले 12 बजे, फिर दोपहर 1 और 2 बजे तक के लिए टाल दिया। दिनभर में लोकसभा की कार्यवाही छह बार स्थगित हुई। इस भारी हंगामे के बीच ही कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक 2026 लोकसभा में पेश किया। इस बिल के पास होने से सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश (CJI) समेत जजों की कुल संख्या 34 से बढ़कर 38 हो जाएगी। यह विधेयक मई में जारी किए गए सरकारी अध्यादेश की जगह लेगा।
संसद का मानसून सत्र और दिनभर का घटनाक्रम
नीट परीक्षा में हुई धांधली का मुद्दा संसद के दोनों सदनों में हावी रहा। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार युवाओं की आवाज दबा रही है और उन पर बल प्रयोग किया जा रहा है। इसके साथ ही विपक्षी नेताओं ने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और सीबीएसई परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियों पर भी तुरंत चर्चा कराने का नोटिस दिया।
केसी वेणुगोपाल का तीखा हमला
कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद केसी वेणुगोपाल ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि नीट और सीबीएसई पेपर लीक से देशभर के लाखों परिवारों में चिंता का माहौल है। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए और संसद में इस पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर बात करने से भाग रही है।
प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन
दूसरी तरफ, सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के हंस द्वार पर मीडिया को संबोधित किया। पीएम मोदी ने कहा कि मानसून सत्र प्रो-एक्टिव और प्रोडक्टिव होना चाहिए। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि संसद में तर्क-वितर्क और शांतिपूर्ण तरीके से सकारात्मक चर्चा की जानी चाहिए ताकि देश के विकास को गति मिल सके।
संसद के कामकाज और देश के युवाओं पर असर
संसद के पहले ही दिन हुए इस टकराव से साफ है कि आने वाले दिनों में भी सत्र का माहौल गरमाया रहेगा। पेपर लीक जैसे संवेदनशील विषय पर बहस न होने से देशभर के परीक्षार्थियों और अभिभावकों में अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। वहीं दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने वाले बिल के पारित होने से अदालतों में लंबित पड़े लाखों मामलों के जल्द निपटारे में मदद मिलेगी और न्याय प्रणाली को मजबूती मिलेगी।