Punjab Anti Drug Campaign: नशे की समस्या से बचाने के लिए शिक्षा विभाग ने एक नई पहल शुरू की है। अब कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करने के लिए विशेष पाठ्यक्रम पढ़ाया जा रहा है। इस कोर्स का उद्देश्य छात्रों को नशे की हकीकत से परिचित कराना और उन्हें इसके खिलाफ मानसिक रूप से मजबूत बनाना है। शिक्षा विभाग द्वारा तैयार किए गए इस 14 सप्ताह के नशा विरोधी पाठ्यक्रम को राज्य के करीब 3600 सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में लागू किया जा रहा है।
आठ अध्यायों में तैयार हुआ कोर्स
इसके तहत 7.5 लाख से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित होंगे। इस कार्यक्रम को जे-पाल से जुड़े सहयोगी संस्थानों के सहयोग से तैयार किया गया है, जिसमें छात्रों को वास्तविक घटनाओं और अनुभवों के माध्यम से जागरूक करने पर जोर दिया गया है। आठ अध्यायों में तैयार किया गया है पाठ्यक्रम इस विशेष पाठ्यक्रम में कुल आठ अध्याय शामिल हैं। इन्हें वास्तविक घटनाओं के आधार पर तैयार किया गया है।
डॉक्यूमेंट्री से समझेंगे नशे का असर
पाठ्यक्रम के अंतर्गत छात्रों को डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के माध्यम से नशे की शुरुआत, इसके व्यक्तिगत और पारिवारिक प्रभावों तथा इससे बाहर निकलने की चुनौतियों के बारे में बताया जा रहा है। इन डॉक्यूमेंट्री फिल्मों में नशे की गिरफ्त में आए लोगों की वास्तविक कहानियां दिखाई जाती हैं, ताकि विद्यार्थी समझ सकें कि नशा किस तरह धीरे-धीरे जीवन को प्रभावित करता है और इससे बचना क्यों जरूरी है।
छात्रों को सिखाए जा रहे हैं नशे से बचने के तरीके
पाठ्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पीयर प्रेशर यानी दोस्तों या साथियों के दबाव से निपटना है। छात्रों को बताया जा रहा है कि अगर कोई उन्हें नशा करने के लिए प्रेरित करता है तो वे किस तरह स्थिति को संभाल सकते हैं। इसके लिए विद्यार्थियों को विनम्रता से मना करना, अपनी बात स्पष्ट रखना, ऐसे माहौल से दूर हट जाना, बातचीत का विषय बदलना और पहले से जवाब तैयार रखने जैसे व्यावहारिक तरीके सिखाए जा रहे हैं। अभियान में अभिभावकों को भी जोड़ा गया नशा विरोधी अभियान को प्रभावी बनाने के लिए अभिभावकों की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है।
नशे से बचाव में परिवार की भूमिका
अभिभावकों को सलाह दी जा रही है कि वे बच्चों के साथ लगातार संवाद बनाए रखें और आंखों का लाल होना, शरीर पर इंजेक्शन के निशान, अत्यधिक थकान या व्यवहार में अचानक बदलाव जैसे संकेतों पर ध्यान दें। शिक्षा विभाग को उम्मीद है कि इस पहल के जरिए विद्यार्थियों में नशे के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और वे भविष्य में इस गंभीर समस्या से खुद को दूर रखने के लिए अधिक सक्षम बन पाएंगे।

