महासमुंद में कोटवार एसोसिएशन ऑफ छत्तीसगढ़ की तहसील इकाई ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम ज्ञापन सौंपकर कोटवारों की लंबे समय से लंबित मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की है। यह ज्ञापन जिला कलेक्टर, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) और तहसीलदार के माध्यम से मुख्यमंत्री तक भेजा गया।
कोटवारों ने बताई अपनी समस्याएं
संघ का कहना है कि प्रदेशभर के कोटवार वर्षों से शासन और आम जनता के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें न तो पर्याप्त पारिश्रमिक मिल रहा है और न ही सामाजिक सुरक्षा से जुड़े आवश्यक लाभ उपलब्ध हैं। सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन और ग्रेच्युटी जैसी सुविधाओं के अभाव में कई कोटवार आर्थिक कठिनाइयों का सामना करने को मजबूर हैं।
नियमितीकरण और संविलियन की मांग
ज्ञापन में संघ ने लंबे समय से सेवा दे रहे कोटवारों के नियमितीकरण की मांग दोहराई है। संघ का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों में लंबे समय तक कार्यरत कर्मचारियों के नियमितीकरण के संबंध में दिए गए सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए कोटवारों को भी राजस्व विभाग में संविलियन का लाभ दिया जाना चाहिए।
वेतन बढ़ाने का प्रस्ताव
कोटवार संघ ने वर्तमान पारिश्रमिक में वृद्धि करते हुए सेवा भूमि के आधार पर नई वेतन व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया है। संघ की मांग है कि बिना सेवा भूमि वाले कोटवारों को 15 हजार रुपये प्रतिमाह, 3 से 7.50 एकड़ सेवा भूमि रखने वालों को 12 हजार रुपये, 7.50 से 10 एकड़ सेवा भूमि वालों को 10 हजार रुपये तथा 10 एकड़ से अधिक सेवा भूमि वाले कोटवारों को 8 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाए।
अन्य मांगों पर भी कार्रवाई की अपील
संघ ने ज्ञापन में कोटवारों की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, कथित भ्रष्टाचार पर रोक लगाने, सेवानिवृत्त कोटवारों के पात्र परिजनों को नियुक्ति में प्राथमिकता देने तथा राजस्व अधिकारियों द्वारा कराए जाने वाले कथित बेगार कार्य पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही बिना निष्पक्ष जांच किसी भी कोटवार पर कार्रवाई नहीं करने की भी मांग रखी गई है।
नगर निकाय क्षेत्रों में नियुक्ति का मुद्दा भी उठाया
कोटवार संघ ने नगर पालिका क्षेत्रों में कोटवारों की नियुक्ति पर लगे प्रतिबंध को हटाने की मांग करते हुए कहा कि शासन उनकी सभी लंबित मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेकर आवश्यक आदेश जारी करे, ताकि प्रदेश के कोटवारों को बेहतर सेवा शर्तें और सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल सके।