रायपुर में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, छत्तीसगढ़ शासन तथा छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (सीकॉस्ट) द्वारा राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद, भारत सरकार के सहयोग से 32वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 के अंतर्गत जिला समन्वयकों एवं रिसोर्स शिक्षकों के लिए एक दिवसीय राज्य स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। यह आयोजन रीजनल साइंस सेंटर, रायपुर में संपन्न हुआ।
कार्यशाला का उद्देश्य प्रदेशभर के शिक्षकों एवं जिला समन्वयकों को राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की नई थीम, परियोजना निर्माण प्रक्रिया, वैज्ञानिक अनुसंधान पद्धति और मूल्यांकन प्रणाली से परिचित कराना था। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को स्थानीय समस्याओं पर आधारित वैज्ञानिक परियोजनाएं तैयार करने के लिए प्रेरित करने की दिशा में मार्गदर्शन दिया गया।
विद्यार्थियों को विज्ञान अनुसंधान से जोड़ने का मंच
राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस देश का एक प्रमुख वैज्ञानिक कार्यक्रम है, जो 10 से 17 वर्ष आयु वर्ग के विद्यार्थियों को विज्ञान एवं अनुसंधान से जोड़ता है। इसके माध्यम से विद्यार्थी वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर स्थानीय समस्याओं की पहचान, आंकड़ों का संग्रहण, विश्लेषण और नवाचार आधारित समाधान प्रस्तुत करते हैं।

वैज्ञानिक नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर
कार्यक्रम में शामिल विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 की थीम "साइंस एंड इनोवेशन फॉर सस्टेनेबिलिटी" की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान क्षमता और नवाचार आधारित सोच विकसित करना वर्तमान समय की जरूरत है।
परियोजना मूल्यांकन प्रक्रिया जानकारी
राज्य समन्वयक डॉ. जे. के. राय ने राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 की रूपरेखा, पात्रता, परियोजना निर्माण, अनुसंधान पद्धति, दस्तावेजीकरण, प्रस्तुतीकरण और मूल्यांकन प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक परियोजनाएं समाज और स्थानीय जरूरतों से जुड़ी होनी चाहिए।
समस्याओं के समाधान परियोजनाएं
कार्यशाला के तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने इस वर्ष की थीम के विभिन्न उपविषयों पर चर्चा की। इनमें कचरा प्रबंधन के लिए R5 तकनीक, ऊर्जा संरक्षण के लिए E4 मॉडल, जल संरक्षण, पुनर्चक्रण, खाद्य, कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्र में भारतीय ज्ञान प्रणालियों के उपयोग जैसे विषय शामिल रहे।
मिशन लाइफ से जुड़ेंगे बाल वैज्ञानिक
राज्य अकादमिक समन्वयक प्रो. (डॉ.) केशव कांत साहू ने विद्यार्थियों को अनुसंधान, डेटा संग्रहण, विश्लेषण और समाधान आधारित सोच विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने शिक्षकों से मिशन लाइफ की भावना के अनुरूप अधिक से अधिक विद्यार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।