नीट-यूजी परीक्षा के पेपर लीक मामले में जांच एजेंसी ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। सीबीआई ने विशेष अदालत में बताया कि लातूर के कोचिंग संचालक शिवराज मोटेगांवकर ने प्रश्न हासिल किए थे। इसके लिए उसने पेपर सेटर को 5 लाख की मोटी रकम दी थी। मोटेगांवकर के फोन से बरामद हस्तलिखित नोट्स ने पूरे रैकेट की पोल खोल दी है। इन नोट्स में मौजूद 132 सवालों में से 111 प्रश्न सीधे मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र से मेल खाते हैं।
कैसे पकड़े गए आरोपी?
जांच के दौरान सीबीआई ने आरोपी का मोबाइल फोन बरामद किया। इस फोन में रसायन विज्ञान के 132 सवालों की 36 तस्वीरें मिली थीं। एजेंसी का कहना है कि इन सवालों को कुलकर्णी की कोचिंग क्लासेस से तैयार किया गया था। नीट-यूजी परीक्षा इस साल 3 मई को 551 शहरों में आयोजित हुई थी। परीक्षा में करीब 23 लाख छात्र शामिल हुए थे। गड़बड़ी की सूचना मिलने के बाद 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई थी।
अमीरों को टारगेट करने का नेटवर्क
कोचिंग संचालक मोटेगांवकर का लातूर में रेनुकाई करियर सेंटर है। कभी मामूली शिक्षक रहे शिवराज की आज नेटवर्थ ₹1500 करोड़ से अधिक बताई जा रही है। जांच में सामने आया कि वह आर्थिक रूप से मजबूत छात्रों को निशाना बनाता था। परीक्षा से पहले उसे ‘वन-ऑन-वन मेंटरिंग’ के जरिए प्रश्न रटवाए जाते थे। इस पूरे नेटवर्क में पुणे की एक ब्यूटीशियन और कई प्रोफेसर भी शामिल थे।
आगे की कानूनी कार्रवाई
सीबीआई इस मामले में अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं बिहार पुलिस ने अलग से 30 आरोपियों को पकड़ा है। जांच में पता चला है कि यह पेपर कई चरणों में बेचा गया था। गुरुग्राम और जयपुर तक फैले इस नेटवर्क की कड़ियां एक-दूसरे से जुड़ी हैं। सीबीआई लगातार डिजिटल साक्ष्यों और वीडियो फुटेज के जरिए अन्य बड़े चेहरों की तलाश कर रही है।