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CCTV फुटेज से POCSO केस में खुलासा
CCTV फुटेज से POCSO केस में खुलासा
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बड़ा फैसला : ग्वालियर में POCSO केस का यू-टर्न, CCTV से खुला सच; जांच अधिकारी पर कार्रवाई

ग्वालियर के POCSO मामले में अदालत ने CCTV फुटेज के आधार पर दो आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने माना कि आरोप साबित नहीं हुए और तत्कालीन जांच अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। मामले में पारिवारिक विवाद की बात भी सामने आई है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 16 Jul 2026, 04:12 PM · अपडेट: 03 Oct 2026, 06:03 AM
मध्य प्रदेश
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

ग्वालियर में सामने आए इस मामले ने POCSO जैसे सख्त कानूनों के इस्तेमाल और पुलिस जांच की निष्पक्षता पर बहस छेड़ दी है। अदालत ने CCTV फुटेज के आधार पर दोनों आरोपियों को बरी कर दिया और तत्कालीन जांच अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। मामला जून 2023 का है। थाटीपुर थाना क्षेत्र में 13 वर्षीय नाबालिग ने शिकायत दर्ज कराई थी कि 10 जून 2023 को उसके चाचा ने घर में अकेला पाकर उसके साथ गलत काम करने की कोशिश की।

13 साल की नाबालिग ने लगाए थे गंभीर आरोप

इसके अलावा चाचा के दोस्त एड संकेत साहू पर भी गंभीर आरोप लगाए गए थे। नाबालिग की शिकायत के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 15 अगस्त 2023 को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। POCSO एक्ट के तहत दर्ज मामले में दोनों को लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा। पुलिस ने मामले में जांच पूरी कर कोर्ट में चार्जशीट भी पेश कर दी थी।

कोर्ट में CCTV फुटेज ने बदल दी पूरी कहानी

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में पेश किए गए CCTV फुटेज ने जांच की दिशा बदल दी। फुटेज में सामने आया कि जिस समय घटना होने की बात कही गई थी, उस दौरान नाबालिग घर से बाहर नहीं गई थी। वहीं आरोपी चाचा भी अपने कमरे से बाहर नहीं आए थे। CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने माना कि अभियोजन की कहानी उपलब्ध सबूतों से मेल नहीं खाती। 

सबूतों के अभाव में आरोपियों को मिली राहत

कोर्ट ने दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ नहीं, बल्कि पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के आधार पर बरी कर दिया। अदालत ने मामले की जांच में लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन सब इंस्पेक्टर बलराम मांझी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट के इस फैसले के बाद पुलिस जांच की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। सुनवाई के दौरान सामने आया कि दोनों भाइयों के बीच पहले से मकान और पैसों को लेकर विवाद चल रहा था। आरोपी ने पहले ही पुलिस अधिकारियों को लिखित शिकायत देकर उन्हें फंसाए जाने की आशंका जताई थी।

निष्पक्ष जांच की जरूरत पर फिर उठी बहस

यह मामला सिर्फ एक परिवार के विवाद तक सीमित नहीं है। इससे यह सवाल भी सामने आया है कि यदि गंभीर मामलों में जांच निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर नहीं होगी तो कानून की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। POCSO जैसे सख्त कानूनों के सही इस्तेमाल के साथ निष्पक्ष जांच भी बेहद जरूरी है।
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