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RSS chief Mohan Bhagwat performing Shastra Pujan (Image Source: Keertiman Media)
RSS chief Mohan Bhagwat performing Shastra Pujan (Image Source: Keertiman Media)
राष्ट्रीय

RSS Vijayadashami: मोहन भागवत का संदेश, विविधता के सम्मान और राष्ट्रीय एकता पर दिया जोर

RSS Vijayadashami: नागपुर स्थित RSS मुख्यालय में विजयादशमी के अवसर पर आयोजित शस्त्र पूजन कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता पर जोर दिया। उन्होंने ‘स्वबोध’ को देश की एकता का आधार बताते हुए संविधान की प्रस्तावना के ‘हम, भारत के लोग’ शब्दों का उल्लेख किया। अपने संबोधन में भागवत ने संत रविदास के योगदान को याद किया और बदलते समय के अनुरूप आवश्यक परिवर्तन अपनाने के साथ शाश्वत मूल्यों को बनाए रखने की बात कही।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 20 Oct 2026, 11:17 AM · 3 मिनट पढ़ने का समय
नागपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
RSS Vijayadashami: नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुख्यालय पर विजयादशमी का पावन पर्व परंपरा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित वार्षिक शस्त्र पूजन कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने शिरकत की और विधि-विधान से शस्त्रों की पूजा की। कार्यक्रम के बाद उपस्थित कार्यकर्ताओं और देशवासियों को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख ने सांस्कृतिक जड़ों, राष्ट्रीय एकता और बदलते समय में शाश्वत मूल्यों को बनाए रखने पर जोर दिया।

भारतीय दर्शन में विविधता और सुरक्षा का भाव

अपने संबोधन में मोहन भागवत ने भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक साझा विरासत को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आप चाहें मंदिरों में जाएं, मठों में दर्शन करें या गुरुद्वारों में शीश नवाएं, हर जगह एक ही तरह का ज्ञान और आध्यात्मिक मार्गदर्शन मिलता है।

"भारतीय विचारधारा का मूल आधार यह है कि हम हर तरह की विविधता का न केवल सम्मान करें और उसे स्वीकार करें, बल्कि सभी को सुरक्षा भी प्रदान करें। पीढ़ियों से यही हमारा मूल स्वभाव रहा है। जो बातें बदलने योग्य हैं, उन्हें समय के साथ बदल जाना चाहिए, लेकिन शाश्वत सत्यों पर हमेशा अडिग रहना चाहिए।"

इसी संदर्भ में उन्होंने कैप्टन स्मित मछार का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके द्वारा किया गया कार्य वास्तव में भारतीय और हिंदू स्वभाव की सहज अभिव्यक्ति है।

'स्वबोध' से ही मजबूत होगा भारत

संघ की 100 वर्षों की यात्रा का उल्लेख करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि आरएसएस का मुख्य कार्य समाज में ‘स्व’ (आत्मबोध) की भावना को जगाना रहा है। इसी ‘स्व’ की नींव पर भारत को एकजुट, अखंड और शक्तिशाली बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

  • संविधान में ‘स्व’ का दर्शन: संघ प्रमुख ने स्पष्ट किया कि इस 'स्वबोध' की स्पष्ट झलक हमारे संविधान की प्रस्तावना के शुरुआती शब्दों—‘हम, भारत के लोग’—में मिलती है।

  • सभ्यता का भावनात्मक आधार: यही 'हम' की भावना देश का वह भावनात्मक जोड़ है, जिसने तमाम विविधताओं के बावजूद भारत को प्राचीन काल से एक राष्ट्र और एक समाज के रूप में बांधकर रखा है।

  • इतिहास की सीख: जब भी हम अपनी इस मूल भावना को भूले, देश का पतन हुआ, हम आपस में बंटे, कमजोर हुए और इसी वजह से हमें सदियों तक गुलामी का दंश झेलना पड़ा।

संकट के दौर में संत रविदास का योगदान 

विदेशी आक्रांताओं के दौर का जिक्र करते हुए भागवत ने संत रविदास के अमूल्य योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि जब देश पर हमले हो रहे थे और अपने धर्म का पालन करने वालों पर अत्याचार का दौर था, उस भयभीत वातावरण में संत रविदास ने समाज का मनोबल बढ़ाया। संत रविदास ने न केवल ‘स्वधर्म निष्ठा’, सामाजिक समरसता और भक्ति का संदेश दिया, बल्कि अपने अनुकरणीय जीवन से समाज को ढांढस बंधाया और उसमें नए आत्मविश्वास का संचार किया।
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