Sharadiya Navratri: शारदीय नवरात्र के पावन पर्व का समापन विजयादशमी के साथ ही भक्तिमय माहौल में हुआ। नौ दिनों तक मां जगदंबा की उपासना में लीन रहने के बाद ग्रामीणों ने अत्यंत भावुक होकर मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया। इस अवसर पर आरंग और आसपास के ग्रामीण इलाकों में एक अलग ही धार्मिक उल्लास देखने को मिला, जहां परंपरा, आस्था और छत्तीसगढ़ी लोक-संस्कृति का सुंदर संगम नजर आया।
घर-घर सजाए गए चौक, उतारी गई आरती
मां दुर्गा की विसर्जन यात्रा जब गांवों की गलियों से होकर गुजरी, तो हर घर के सामने उत्सवी माहौल बन गया। महिलाओं ने अपने आंगनों और दरवाजों पर रंग-बिरंगे चौक पुरे और पूजा की थालियां सजाकर माता रानी का स्वागत किया। जैसे ही प्रतिमाएं घरों के सामने से गुजरीं, महिलाओं और श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से माता की आरती उतारी तथा परिवार एवं क्षेत्र की सुख-समृद्धि, आरोग्यता और खुशहाली की कामना की। आरती के पश्चात सभी भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया, जिसे श्रद्धालुओं ने बड़े ही भाव से ग्रहण किया।
मांदर की गूंज और जसगीतों पर झूमे श्रद्धालु
विसर्जन यात्रा के दौरान छत्तीसगढ़ी लोक परंपरा की जीवंत झलक देखने को मिली। पारंपरिक वाद्य यंत्र मांदर की थाप और जसगीतों के स्वर पर युवा, बुजुर्ग और महिलाएं झूमते-नाचते नजर आए। माता के जयकारों और आतिशबाजी से गलियां गूंज उठीं। हर तरफ भक्ति और उल्लास का वातावरण बना हुआ था। इस आयोजन में गांव के सभी वर्गों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सद्भाव और आपसी भाईचारे की मिसाल भी कायम हुई।अगले बरस फिर आने की आस के साथ विदाई
नौ दिनों की निरंतर सेवा और पूजा-अर्चना के बाद विदाई की इस घड़ी में भक्तों की आंखें नम थीं। श्रद्धालुओं ने माता से आशीर्वाद मांगते हुए उनसे प्रार्थना की कि वे अगले वर्ष फिर से आकर अपने भक्तों का जीवन खुशियों और समृद्धि से भर दें। तालाबों और जलाशयों में विसर्जन के साथ ही इस वर्ष के नवरात्र उत्सव का समापन हो गया, लेकिन गांवों में मां के आगमन का उत्साह और उनकी स्मृति अब भी हर मन में रसी-बसी है।
रिपोर्ट - मोहनदास मानिकपुरी







