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Maa Kaushalya Mandir Chandkhuri (Image Source: Keertiman Media)
Maa Kaushalya Mandir Chandkhuri (Image Source: Keertiman Media)
रायपुर संभाग

Arang News: चंदखुरी का मां कौशल्या मंदिर, माता की गोद में विराजते हैं बाल श्रीराम

Arang News: चंदखुरी स्थित मां कौशल्या मंदिर माता की गोद में विराजित बाल श्रीराम की प्रतिमा, धार्मिक मान्यताओं और ऐतिहासिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है।

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प्रकाशित: 17 Oct 2026, 01:07 PM · 3 मिनट पढ़ने का समय
आरंग
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Arang News: छत्तीसगढ़ की पावन माटी केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपने गहरे पौराणिक और सांस्कृतिक ताने-बाने के लिए भी जानी जाती है। रामायण काल से जुड़े कई ऐसे प्रसंग और स्थान यहाँ की लोक-संस्कृति में रचे-बसे हैं, जो श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं। इन्हीं में से एक बेहद खास और ऐतिहासिक स्थल है—रायपुर जिले के आरंग क्षेत्र में स्थित चंदखुरी का मां कौशल्या मंदिर। 
रायपुर जिला मुख्यालय से करीब 27 किलोमीटर और मंदिरहसौद से लगभग 12 किलोमीटर दूर स्थित चंदखुरी का यह मंदिर देश-विदेश में अपनी एक अलग ही पहचान रखता है। चारों तरफ जलसेन तालाब के फैलाव और उसके ठीक बीच में स्थापित यह मंदिर किसी को भी पहली नज़र में भक्ति और शांति से सराबोर कर देता है।

ननिहाल की पौराणिक मान्यता और वात्सल्य रूप 

स्थानीय लोकमान्यताओं और जनश्रुतियों के अनुसार चंदखुरी को माता कौशल्या की जन्मस्थली और भगवान श्रीराम का 'ननिहाल' माना जाता है। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ की परंपरा में भांजे को विशेष सम्मान देने की प्रथा आज भी गहराई से जुड़ी हुई है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यहाँ स्थापित प्रतिमा है। आमतौर पर मंदिरों में श्रीराम का धनुर्धारी या राजा राम वाला स्वरूप देखने को मिलता है, लेकिन चंदखुरी में माता कौशल्या अपनी गोद में नन्हें बाल श्रीराम को लिए हुए विराजित हैं। माँ और पुत्र का यह वात्सल्य रूप भक्तों के मन में सहज ही श्रद्धा, प्रेम और वात्सल्य भाव जगा देता है।

आठवीं-दसवीं शताब्दी की प्राचीनता और तालाब के बीच की सुंदरता 

इतिहास और पुरातात्विक विवरणों पर नज़र डालें तो इस मंदिर का निर्माण 8वीं से 10वीं शताब्दी के मध्य का माना जाता है। यद्यपि इसके सटीक निर्माण काल को लेकर पुरातात्विक शोध निरंतर जारी हैं, लेकिन इसका ऐतिहासिक महत्व प्राचीन काल से चला आ रहा है। समय-समय पर इस मंदिर का जीर्णोद्धार भी होता रहा है, जिसमें वर्ष 1973 में कराया गया पुनर्निर्माण कार्य प्रमुख रूप से दर्ज है। भौगोलिक दृष्टि से देखें तो जलसेन तालाब के बीच स्थित होने के कारण मंदिर का दृश्य काफी विहंगम लगता है। मुख्य मार्ग से जल मंदिर तक पहुँचने के लिए एक सुंदर पुलनुमा रास्ता (कॉज़वे) बनाया गया है, जो यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को जल के बीच से होते हुए गर्भगृह तक ले जाता है।

राम वन गमन परिपथ और 51 फीट ऊंची प्रतिमा 

छत्तीसगढ़ की श्रीराम से जुड़ी सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रदेश में 'राम वन गमन पर्यटन परिपथ' योजना की शुरुआत की गई थी। इसके तहत चंदखुरी धाम का भव्य सौंदर्यीकरण और परिसर का विस्तार किया गया। अक्टूबर 2021 में इस नवविकसित परिसर का लोकार्पण हुआ, जिसके बाद चंदखुरी को राष्ट्रीय स्तर पर एक नया पहचान-चित्र मिला। मंदिर परिसर के मुख्य प्रवेश द्वार पर स्थापित भगवान श्रीराम की 51 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा यहाँ का प्रमुख आकर्षण बन चुकी है, जो दूर से ही श्रद्धालुओं को अपनी भव्यता से आकर्षित करती है।
नवरात्रि, रामनवमी और प्रमुख धार्मिक पर्वों पर यहाँ हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु पहुँचते हैं। पूरा परिसर भजन, आरती और भक्तिमय वातावरण से गूंज उठता है। चंदखुरी का यह कौशल्या धाम महज़ एक पूजा-अर्चना का केंद्र नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ी लोक-संस्कृति, मातृत्व के प्रति सम्मान और श्रीराम के प्रति अगाध श्रद्धा का जीवंत प्रतीक है। जलसेन तालाब की स्वच्छता और इस प्राकृतिक-धार्मिक वातावरण को सुरक्षित रखना हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए इस सांस्कृतिक विरासत को सहेजने जैसा है।
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