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स्कूल केइंता अभियान का शुभारंभ
स्कूल केइंता अभियान का शुभारंभ
शिक्षा

नई शुरुआत : जहां कभी स्कूल नहीं था, वहां पहली बार गूंजी स्कूल की घंटी, 21 बच्चों का हुआ नामांकन

नारायणपुर जिले के सुदूर अबूझमाड़ स्थित कोहकापार गांव में पहली बार प्राथमिक स्कूल शुरू हुआ है। ‘स्कूल केइंता’ अभियान के तहत 21 बच्चों का नामांकन किया गया। कलेक्टर नम्रता जैन ने गांव पहुंचकर स्कूल का शुभारंभ किया और ग्रामीणों से संवाद कर विकास कार्यों की समीक्षा भी की।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
18 Jul 2026, 11:17 AM
नारायणपुर
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कभी नक्सल हिंसा और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण देश-दुनिया से लगभग कटे रहे अबूझमाड़ में अब बदलाव की नई शुरुआत दिखाई दे रही है। नारायणपुर जिले के कोहकापार गांव में पहली बार प्राथमिक स्कूल शुरू हुआ है। जिस गांव के बच्चों ने अपने ही गांव में कभी स्कूल नहीं देखा था, वहां अब पढ़ाई की शुरुआत हो चुकी है।
यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव मानी जा रही है। कोहकापार गांव जिला मुख्यालय से करीब 100 किलोमीटर दूर स्थित है। यहां तक पहुंचने के लिए आज भी उफनते नदी-नाले, ऊंचे पहाड़, घने जंगल और संकरे पगडंडी रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद कलेक्टर नम्रता जैन बाइक से गांव पहुंचीं और प्राथमिक शाला का शुभारंभ किया।

स्कूल केइंता अभियान से 21 बच्चों का हुआ नामांकन

गांव में पहली बार स्कूल खुलने से बच्चों और ग्रामीणों में खासा उत्साह देखने को मिला। जिले में चलाए जा रहे ‘स्कूल केइंता’ अभियान के तहत उन बच्चों की पहचान की गई, जो कभी स्कूल नहीं गए थे या बीच में पढ़ाई छोड़ चुके थे। घर-घर सर्वे के बाद कोहकापार में प्राथमिक शाला शुरू की गई। पहले ही दिन 21 बच्चों का नामांकन हुआ, जिनमें 11 बालिकाएं और 10 बालक शामिल हैं। स्कूल के पहले दिन कलेक्टर नम्रता जैन ने बच्चों का पारंपरिक मुकुट पहनाकर स्वागत किया। उन्होंने विद्यार्थियों को स्कूल बैग, किताबें और अन्य शैक्षणिक सामग्री वितरित की। घोटूल में संचालित हो रही कक्षा में उन्होंने बच्चों के साथ समय बिताया और स्वयं पढ़ाकर शिक्षा के प्रति प्रेरित किया।

माड़ संवाद में ग्रामीणों की मांगें

पहली बार स्कूल पहुंचे बच्चों के चेहरों पर उत्साह और खुशी साफ दिखाई दे रही थी। ‘माड़ संवाद’ में ग्रामीणों ने रखीं बुनियादी सुविधाओं की मांग स्कूल के उद्घाटन के बाद कलेक्टर ने गांव में ‘माड़ संवाद’ कार्यक्रम के तहत चौपाल लगाई। इस दौरान ग्रामीणों से शिक्षा, स्वास्थ्य, आंगनबाड़ी, पोषण और सरकारी योजनाओं की स्थिति पर चर्चा की गई। लोगों ने बिजली, नल-जल योजना, मोबाइल नेटवर्क और अन्य बुनियादी सुविधाओं की मांग रखी। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

2 हजार से ज्यादा बच्चे शिक्षा से जुड़े

कलेक्टर नम्रता जैन ने बताया कि ‘स्कूल केइंता’ अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अबूझमाड़ का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। अभियान के तहत अब तक जिले के 2,000 से अधिक बच्चों का शासकीय विद्यालयों और छात्रावासों में प्रवेश कराया जा चुका है। उन्होंने कहा कि कोहकापार में पहली बार स्कूल की शुरुआत इस अभियान की बड़ी उपलब्धियों में शामिल है। एक समय था जब अबूझमाड़ की पहचान केवल नक्सल हिंसा और दुर्गम जंगलों से होती थी। अब वही क्षेत्र शिक्षा और विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। कोहकापार में पहली बार गूंजी स्कूल की घंटी इस बात का संकेत है कि बदलाव अब केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के भविष्य तक भी पहुंच चुका है।
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