छत्तीसगढ़ स्टेट फार्मेसी काउंसिल की आम सभा की बैठक बुधवार को काफी हंगामेदार रही। बैठक में फार्मासिस्ट अभिषेक चंदा के निलंबन का मुद्दा सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। लंबे समय से चले आ रहे विवाद के बीच काउंसिल सदस्यों ने संबंधित दस्तावेजों की जांच की और चर्चा के बाद अभिषेक चंदा का निलंबन वापस लेने का निर्णय लिया। काउंसिल सदस्यों के अनुसार, बैठक में दस्तावेजों के परीक्षण के दौरान कई बिंदुओं पर चर्चा हुई। इसके बाद सदस्यों ने एकमत होकर अभिषेक चंदा के पंजीयन को बहाल करने का फैसला लिया। इस निर्णय के बाद बैठक में मौजूद सदस्यों ने इसे न्याय की जीत बताया।
महत्वपूर्ण एजेंडों पर हुई चर्चा
आम सभा की बैठक में केवल अभिषेक चंदा के निलंबन का मामला ही नहीं, बल्कि अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा की गई। बैठक में 2 अप्रैल 2026 को आयोजित विशेष सम्मिलन की कार्यवाही विवरण के अनुमोदन का प्रस्ताव रखा गया, जिसे सदस्यों ने चर्चा के बाद मंजूरी दी। इसके अलावा संजय जैन द्वारा पंजीयन के लिए दिए गए आवेदन पर कार्यसमिति के अभिमत का अनुमोदन भी बैठक के एजेंडे में शामिल रहा। वहीं छत्तीसगढ़ स्टेट फार्मेसी काउंसिल में पूर्णकालिक रजिस्ट्रार की नियुक्ति को लेकर भी सदस्यों के बीच चर्चा हुई।
सच्चाई की हुई जीत
काउंसिल सदस्य डॉ. राकेश गुप्ता और भगत राम शर्मा ने बैठक के बाद कहा कि आज सच्चाई की जीत हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि फार्मासिस्ट अभिषेक चंदा का पंजीयन कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर और द्वेषपूर्ण तरीके से निलंबित किया गया था। सदस्यों का कहना है कि बैठक में दस्तावेजों की जांच के बाद कई सवाल सामने आए, जिसके आधार पर निलंबन की कार्रवाई को उचित नहीं माना गया। उन्होंने कहा कि काउंसिल ने सभी पहलुओं को देखने के बाद सर्वसम्मति से निलंबन वापस लेने का निर्णय लिया।
रजिस्ट्रार पर लगे आरोप
बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ स्टेट फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार अश्वनी गुर्देकर पर कुछ सदस्यों ने पक्षपात, तानाशाही और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। आरोपों को लेकर बैठक में माहौल गरम हो गया और काफी देर तक बहस चलती रही। सदस्यों के आरोपों के बीच रजिस्ट्रार अश्वनी गुर्देकर बैठक छोड़कर चले गए। इसको लेकर भी कुछ सदस्यों ने आपत्ति जताई और कहा कि महत्वपूर्ण बैठक के दौरान इस तरह बाहर जाना उचित नहीं है। हालांकि, रजिस्ट्रार अश्वनी गुर्देकर ने इन आरोपों पर सफाई देते हुए कहा कि बैठक में लगातार शोर-शराबा हो रहा था। उन्होंने बताया कि अधिक शोर के कारण उनके सिर में दर्द होने लगा था, जिसकी जानकारी उन्होंने समूह में संदेश के माध्यम से दी और अध्यक्ष को अवगत कराने के बाद बैठक से बाहर चले गए।निलंबन मामले में आया फैसला
बिलासपुर निवासी फार्मासिस्ट अभिषेक चंदा ने पहले फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार पर भ्रष्टाचार सहित कई गंभीर आरोप लगाए थे। इसके बाद उनका पंजीयन निलंबित कर दिया गया था। इस कार्रवाई को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। बुधवार को हुई आम सभा की बैठक में इस पूरे मामले से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से जांच की गई। काउंसिल के कुछ सदस्यों का कहना है कि जांच के दौरान दस्तावेजों में छेड़छाड़ के संकेत मिले, जिसके बाद उन्होंने निलंबन की कार्रवाई पर सवाल उठाए।
बैठक में सभी पहलुओं पर चर्चा के बाद अभिषेक चंदा का निलंबन वापस लेने का निर्णय लिया गया। अब इस फैसले के बाद फार्मेसी काउंसिल में चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है।