अपनी स्वादिष्ट मुंगौड़ी, समोसा और जलेबी के लिए पूरे छत्तीसगढ़ में पहचान बना चुकी रायपुर केंद्रीय जेल की आस्था कैंटीन अब एक और खास पहल के साथ सामने आई है। जेल प्रशासन ने कैदियों द्वारा तैयार किए जाने वाले व्यंजनों की सूची में अब ‘जेल की रोटी’ को भी शामिल कर लिया है। इस नई शुरुआत के जरिए आम लोग भी जेल में बंद कैदियों के हाथों से तैयार किया गया पारंपरिक और स्वादिष्ट भोजन का अनुभव ले सकेंगे। यह पहल केवल भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे कैदियों को समाज से जोड़ने और उनके हुनर को एक सकारात्मक दिशा देने का उद्देश्य भी जुड़ा हुआ है। जेल प्रशासन का मानना है कि कैदियों को काम के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने और उनके अंदर जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में ऐसी गतिविधियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
275 रुपए में मिलेगा पूरा फूड पैकेट
जेल प्रशासन ने ‘जेल की रोटी’ के लिए विशेष फूड पैकेट तैयार किया है, जिसकी कीमत 275 रुपए निर्धारित की गई है। इस पैकेट में लोगों को घर जैसे स्वाद वाला पूरा भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। इसमें रोटी, चावल, दाल, मौसमी सब्जी, पापड़, सलाद और अचार शामिल रहेगा। शुरुआती दौर में व्यवस्था को बेहतर तरीके से संचालित करने के लिए प्रतिदिन केवल 30 फूड पैकेट ही तैयार किए जाएंगे। इसके लिए ग्राहकों को पहले से आस्था कैंटीन में बुकिंग करानी होगी।
कैदियों के पुनर्वास को मिलेगा बढ़ावा
जेल प्रशासन का कहना है कि सीमित संख्या में पैकेट उपलब्ध कराने का उद्देश्य भोजन की गुणवत्ता बनाए रखना और पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से संचालित करना है। रायपुर केंद्रीय जेल के अधीक्षक योगेश क्षत्री ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य व्यावसायिक लाभ कमाना नहीं है। इसका मुख्य लक्ष्य जेल में सजा काट रहे कैदियों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उनके पुनर्वास की प्रक्रिया को मजबूत करना है। उन्होंने बताया कि फूड पैकेट की बिक्री से मिलने वाली पूरी राशि कैदियों के कल्याण और उनके कौशल विकास से जुड़ी गतिविधियों पर खर्च की जाएगी।आस्था कैंटीन की बढ़ती लोकप्रियता
इससे कैदियों को अपनी मेहनत का महत्व समझने का अवसर मिलेगा और भविष्य में समाज की मुख्यधारा से जुड़ने में मदद मिलेगी। रायपुर केंद्रीय जेल की आस्था कैंटीन और कैफे सेंटर पिछले कई वर्षों से लोगों के बीच लोकप्रिय है। यहां तैयार होने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वाद के कारण बड़ी संख्या में लोग नियमित रूप से पहुंचते हैं। मुंगौड़ी, समोसा और जलेबी जैसे उत्पादों को लोगों का अच्छा प्रतिसाद मिलने के बाद अब ‘जेल की रोटी’ को लेकर भी शहरवासियों में उत्सुकता बढ़ गई है।