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No UPI Payment Day: यूपीआई पर फीस के प्रस्ताव से भड़के व्यापारी, आज मनाएंगे नो यूपीआई पेमेंट डे
No UPI Payment Day: मध्य प्रदेश के व्यापारी 2000 रुपये से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर प्रस्तावित MDR शुल्क के विरोध में आज सांकेतिक हड़ताल करेंगे। व्यापारी QR कोड ढककर डिजिटल भुगतान लेने से इनकार जताएंगे और Zero MDR व्यवस्था जारी रखने की मांग करेंगे।
No UPI Payment Day: डिजिटल लेन-देन के दौर में अब मध्य प्रदेश के बाजारों में एक बड़ा विरोध देखने को मिल सकता है। राज्य के व्यापारियों ने 2000 रुपये से अधिक के
यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस प्रस्ताव के विरोध में आज प्रदेशभर के व्यापारी ‘नो यूपीआई पेमेंट डे’ के रूप में सांकेतिक हड़ताल करेंगे। यह कॉल अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल द्वारा दी गई है। संगठन ने राज्यभर के दुकानदारों और कारोबारियों से इस मुहिम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है।
कैसे दर्ज होगा विरोध? इस विरोध
प्रदर्शन का तरीका काफी अलग और सांकेतिक रखा गया है। दिनभर व्यापारी अपनी दुकानों पर लगे यूपीआई पेमेंट स्कैनर (QR Code) को काले कपड़े से ढक कर रखेंगे, ताकि डिजिटल पेमेंट लेने से इनकार के साथ-साथ सरकार तक अपनी नाराजगी का कड़ा संदेश पहुंचाया जा सके।
क्या है विवाद का कारण?
अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल (मध्य प्रदेश) के महासचिव अनुपम अग्रवाल के अनुसार, 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के व्यावसायिक यूपीआई लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत
एमडीआर शुल्क लगाने की चर्चाएं हैं।
अधिकतम शुल्क की सीमा: 75 हजार रुपये या उससे अधिक के बड़े लेन-देन पर यह फीस अधिकतम 3 रुपये तक हो सकती है।
व्यापारियों का पक्ष: दुकानदारों का कहना है कि शुरुआत में सरकार ने उन्हें कैशलेस और डिजिटल भुगतान अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। अब जब ग्राहक और व्यापारी पूरी तरह यूपीआई पर निर्भर हो चुके हैं, तब इस तरह का शुल्क थोपना सरासर अन्याय है। इससे सीधे तौर पर व्यापार की लागत बढ़ जाएगी।
इन बड़े कारोबारों पर पड़ेगा सबसे भारी असर
थोक बाजार, सराफा (ज्वेलरी), ऑटोमोबाइल और बड़े किराना कारोबार में ज्यादातर लेन-देन 2,000 रुपये से कहीं ज्यादा के होते हैं। ऐसे में यह नया नियम इन सेक्टरों की कमर तोड़ सकता है:
किराना बाजार: अकेले भोपाल के थोक किराना बाजार में करीब 500 दुकानें हैं, जहां 90% से अधिक लेन-देन 2,000 रुपये की सीमा से ऊपर ही होते हैं।
सराफा और ऑटोमोबाइल: ज्वेलरी मार्केट में लगभग 95% भुगतान बड़े होते हैं। वहीं, ऑटोमोबाइल सेक्टर में गाड़ियों की बुकिंग का एक ही ट्रांजैक्शन 25 हजार से 1 लाख रुपये के बीच होता है।
पीएम और वित्त मंत्री को भेजा गया पत्र
मामले की गंभीरता को देखते हुए 'भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज' भी व्यापारियों के समर्थन में उतर आया है। संगठन ने 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 'जीरो एमडीआर' (Zero MDR) की व्यवस्था बहाल रखने की मांग की है। चैंबर के अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री, केंद्रीय वित्त मंत्री और राज्य के शीर्ष संवैधानिक पदाधिकारियों को पत्र लिखकर इस प्रस्तावित शुल्क को तुरंत वापस लेने की गुहार लगाई है। व्यापारियों का साफ कहना है कि अगर यह फैसला वापस नहीं लिया गया, तो आगे यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।