देश की राजनीति में इस समय जहां एक तरफ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी (TMC) में आंतरिक उथल-पुथल की चर्चाएं गर्म हैं, वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं।
शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे के गढ़ 'मातोश्री' में हुई एक बैठक के बाद राज्य में एक बार फिर "पार्टी में टूट" की अटकलें तेज हो गई हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि उद्धव गुट के कई सांसद पाला बदल सकते हैं।
क्यों गहराया संकट? 'मातोश्री' की बैठक से 5 सांसद नदारद
महाराष्ट्र में शिवसेना (UBT) के भीतर इस नई दरार की सबसे बड़ी और ठोस वजह हाल ही में मातोश्री में बुलाई गई सांसदों की समीक्षा बैठक बनी।
कुल सांसद: शिवसेना (UBT) के पास फिलहाल 9 सांसद हैं।
बैठक में पहुंचे: इस महत्वपूर्ण बैठक में केवल 4 सांसद ही शामिल हुए।
गायब सांसद: 5 बड़े चेहरे इस बैठक से पूरी तरह नदारद रहे।
कौन हैं वो 5 सांसद जिन पर टिकी हैं निगाहें? बैठक से गायब रहने वाले सांसदों में संजय जाधव, संजय देशमुख, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और नागेश पाटिल अष्टिकर के नाम शामिल हैं। इन सांसदों की अनुपस्थिति ने इन चर्चाओं को हवा दे दी है कि ये सभी जल्द ही मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं।
टूट की खबरों पर उद्धव ठाकरे का बड़ा बयान
पार्टी में दोबारा बड़ी बगावत की आहट के बीच शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे का एक बेहद चौंकाने वाला और भावुक बयान सामने आया है। उन्होंने बागियों को रोकने के बजाय साफ रुख अपनाते हुए कहा:
"अभी मेरा समय नहीं है:" उद्धव ने अपने सांसदों से कहा कि आज भले ही हमारा समय कठिन है, लेकिन आज नहीं तो कल हमारा वक्त जरूर आएगा। हमें संघर्ष के लिए तैयार रहना होगा।
"जाने वालों को पछतावा होगा:" उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जिन लोगों ने बालासाहेब ठाकरे की मूल शिवसेना को छोड़ा है, उन्हें एक दिन पछतावा जरूर होगा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होगी।
दबाव की राजनीति नहीं: उद्धव ने पुरानी बगावत को याद करते हुए कहा, "4 साल पहले जब 40 विधायक अलग हुए थे, मुझे उसकी भनक थी। लेकिन मैंने किसी पर दबाव नहीं डाला, न ही किसी के घोटालों की फाइलें खुलवाईं। अगर आज भी कोई जाना चाहता है, तो वह खुशी-खुशी जा सकता है। मैं उनके अच्छे राजनीतिक भविष्य की कामना करूँगा।"
एकनाथ शिंदे गुट की सफाई
एक तरफ जहाँ राजनीतिक पंडित इसे 'ऑपरेशन टाइगर' (UDB की बची हुई शिवसेना को शिंदे गुट में मिलाना) का नाम दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इन खबरों का खंडन किया है। शिंदे गुट की ओर से साफ किया गया है कि उनकी फिलहाल शिवसेना (UBT) में किसी भी तरह की नई टूट कराने की कोई योजना या प्रयास नहीं है।
क्या इतिहास खुद को दोहराएगा?
महाराष्ट्र की राजनीति ने पिछले कुछ सालों में कई अप्रत्याशित मोड़ देखे हैं। 4 साल पहले जो पटकथा विधायकों के साथ लिखी गई थी, क्या अब वही कहानी सांसदों के साथ दोहराई जाएगी?
भले ही शिंदे गुट इस दावों को नकार रहा हो और उद्धव ठाकरे 'फ्री हैंड' देने की बात कर रहे हों, लेकिन 5 सांसदों का एक साथ बैठक से गायब होना महज एक इत्तेफाक नहीं हो सकता। आने वाले दिन महाराष्ट्र की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक होने वाले हैं।
