Palamu News: वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर आज नावाबाजार प्रखंड सह अंचल कार्यालय का औचक निरीक्षण करने पहुंचे। मंत्री के अचानक पहुंचते ही कार्यालय की व्यवस्था की स्थिति सामने आ गई। मुख्य गेट पर ताला लटका मिला और कार्यालय के अंदर न तो कोई अधिकारी मौजूद था और न ही कर्मचारी। कार्यालय बंद मिलने पर वित्त मंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने तत्काल पलामू के उपायुक्त को फोन कर पूरे मामले की जानकारी दी और कार्यालय की स्थिति से अवगत कराया। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों की पहल पर कार्यालय का ताला खुलवाया गया।
SIR ड्यूटी के बीच नदारद मिले अंचलाधिकारी
कार्यालय खुलने के बाद भी नहीं मिले अंचलाधिकारी कार्यालय खुलने के बाद वित्त मंत्री ने अलग-अलग कक्षों का निरीक्षण किया। इस दौरान अंचलाधिकारी अपने कक्ष में मौजूद नहीं मिले। इसके बाद मंत्री ने अंचल निरीक्षक से कार्यालय के कामकाज और मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था की जानकारी ली। SIR ड्यूटी का दिया गया हवाला अंचल निरीक्षक ने मंत्री को बताया कि इन दिनों विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के कार्य में पदाधिकारी और कर्मचारियों की तैनाती की गई है। इसी वजह से कार्यालय में नियमित उपस्थिति प्रभावित हुई है।
ग्रामीणों को परेशानी न हो
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की ड्यूटी किसी अन्य सरकारी कार्य में लगाई गई हो, लेकिन इसका असर आम लोगों से जुड़े नियमित कामकाज पर नहीं पड़ना चाहिए। ग्रामीणों को परेशानी नहीं होनी चाहिए वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि सरकारी कार्यालयों में कार्य संस्कृति बेहतर होना जरूरी है। दूर-दराज के इलाकों से अपनी समस्याएं और जरूरी काम लेकर आने वाले ग्रामीणों को अधिकारियों और कर्मचारियों की गैरमौजूदगी के कारण परेशान नहीं होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी जिम्मेदारियों का गंभीरता से निर्वहन करने और कार्यालय की व्यवस्था सुचारू बनाए रखने के निर्देश दिए।
लंबित कामकाज का भी लिया जायजा
लंबित कार्यों की भी ली जानकारी निरीक्षण के दौरान मंत्री ने अंचल कार्यालय की अन्य व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया। उन्होंने लंबित मामलों, आम लोगों से जुड़े कार्यों और कार्यालय में चल रहे कामकाज की जानकारी ली। औचक निरीक्षण के दौरान कार्यालय में मिली अव्यवस्था को लेकर मंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक सुधार के निर्देश दिए। मंत्री के निरीक्षण के बाद प्रशासनिक व्यवस्था और कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखना होगा कि इस मामले के बाद कार्यालय की कार्यप्रणाली में कितना बदलाव आता है।

