प्रदेश अध्यक्ष निलंबित, जिलों में ताबड़तोड़ कार्रवाई
प्रशासनिक सख्ती की शुरुआत करते हुए पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष भागवत कश्यप को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, अलग-अलग जिलों से मिल रही रिपोर्ट के अनुसार प्रशासनिक अमला पूरी तरह एक्शन मोड में आ चुका है:
बिलासपुर में अल्टीमेटम: जिले के सभी 5 तहसीलों—बिलासपुर, बिल्हा, मस्तूरी, तखतपुर और कोटा के 259 पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। उन्हें तत्काल ड्यूटी ज्वाइन करने और तहसीलदार के माध्यम से उसी दिन लिखित स्पष्टीकरण देने के निर्देश हैं। तय समय पर मुख्यालय में नहीं मिलने पर एकपक्षीय कार्रवाई और सेवा में व्यवधान मानने की चेतावनी दी गई है।
सरगुजा संभाग में 819 नोटिस: संभाग आयुक्त नरेंद्र दुग्गा के निर्देश पर छह जिलों के एसडीएम ने हड़तालियों पर शिकंजा कसा है। इनमें सरगुजा के 216, सूरजपुर के 192, बलरामपुर के 150, जशपुर के 150, कोरिया के 60 और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर के 51 पटवारी शामिल हैं।
बलरामपुर में निलंबन: बलरामपुर जिले में मुख्यालय में निवास न करने के गंभीर आरोप में पांच पटवारियों—गौतम पटेल, पन्नेलाल सोनवानी, कपिल देव भगत, धीरेंद्र उरमलिया और शैलेश मेहता को निलंबित कर दिया गया है।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ में चेतावनी: सारंगढ़, बरमकेला और सरिया तहसीलों में भी हड़ताल के चलते कामकाज प्रभावित होने पर पटवारियों को नोटिस देकर अविलंब काम पर लौटने को कहा गया है।
आम जनता और सरकारी योजनाओं पर भारी पड़ रहा असर
पटवारियों के काम से दूर रहने का असर अब केवल तहसीलों के अंदरूनी कामकाज तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका सीधा असर मैदानी स्तर पर चल रही महत्वपूर्ण योजनाओं और आम नागरिकों पर पड़ रहा है। वर्तमान में धान खरीदी की तैयारियों के बीच प्रशासनिक व्यवस्था पटरी से उतरती दिख रही है।
इन प्रमुख कार्यों पर लग गई है लगाम:
डिजिटल क्रॉप सर्वे और फसल सत्यापन: खेतों में जाकर फसलों की जियो-टेगिंग और भौतिक सत्यापन का कार्य रुक गया है।
एग्रीस्टैक और धान खरीदी: किसानों के अभिलेखों की जांच अटकने से धान खरीदी की तैयारियों पर असर पड़ा है।
आपदा और राहत कार्य: चक्रवाती तूफानों की वजह से फसलों को हुए नुकसान का आकलन और उससे जुड़े राहत कार्य बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
आम जनजीवन से जुड़े दस्तावेज: आय, जाति और निवास प्रमाण पत्रों के लिए जरूरी जांच प्रतिवेदन समय पर नहीं मिल पा रहे हैं।
राजस्व मामले: नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और राजस्व न्यायालयों के तमाम प्रकरण ठप पड़े हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
फिलहाल, एक तरफ जहां पटवारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ शासन की इस सख्त कार्रवाई ने माहौल को और गर्मा दिया है। देखना यह होगा कि इस गतिरोध को तोड़ने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।







