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Dr. Varnika Sharma (Image Source: Social Media)
Dr. Varnika Sharma (Image Source: Social Media)
रायपुर

Child Safety: छत्तीसगढ़ के गांवों में बनेंगी बाल संरक्षण समितियां 

Child Safety: कोरबा की घटना के बाद छत्तीसगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग गांव और पंचायत स्तर पर बाल संरक्षण एवं सतर्कता समितियां गठित करने की तैयारी कर रहा है।

ग
प्रकाशित: 01 Nov 2026, 05:40 PM · 4 मिनट पढ़ने का समय
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Child Safety: बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों की रोकथाम और उन्हें सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग नई पहल करने जा रहा है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने ग्राम और पंचायत स्तर पर बाल संरक्षण एवं सतर्कता समितियां गठित करने की पहल की है। इन समितियों के माध्यम से गांवों में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े संभावित खतरों की पहचान कर समय रहते जरूरी कदम उठाए जाएंगे। यह पहल कोरबा जिले में एक बालिका के साथ हुई गंभीर आपराधिक घटना और उसकी मृत्यु के बाद सामने आई है। आयोग अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने प्रभावित परिवार से मुलाकात कर संवेदनाएं व्यक्त कीं और परिवार की मौजूदा परिस्थितियों की जानकारी ली।

दूसरे बच्चे की शिक्षा और सुरक्षा पर विशेष जोर

परिवार से मुलाकात के दौरान डॉ. शर्मा ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने जिला बाल संरक्षण अधिकारी को परिवार के लगातार संपर्क में रहने और परिवार के दूसरे बच्चे की पढ़ाई बिना किसी रुकावट के जारी रखने के लिए शैक्षणिक एवं विधिक सहायता सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने बच्चे की सुरक्षा, देखभाल और शिक्षा पर नियमित निगरानी रखने के निर्देश भी दिए। साथ ही कहा कि परिवार को सहायता उपलब्ध कराने के दौरान उसकी निजता, गरिमा और भावनाओं का विशेष ध्यान रखा जाए।

गांव और पंचायत स्तर पर गठित होंगी समितियां

डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बच्चों के खिलाफ अपराधों को रोकने के लिए केवल घटना के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। ऐसी व्यवस्था जरूरी है, जिससे संभावित खतरे की पहचान पहले ही हो सके और समय रहते संबंधित अधिकारियों तक सूचना पहुंचाई जा सके। इसी उद्देश्य से आयोग ग्राम एवं पंचायत स्तर पर 'ग्राम स्तरीय बाल संरक्षण एवं सतर्कता समिति' के गठन का प्रस्ताव तैयार करेगा। इन समितियों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, पंचायत प्रतिनिधियों, महिला स्व-सहायता समूहों की सक्रिय महिलाओं और समाज के जिम्मेदार लोगों को शामिल करने की योजना है।
समितियां बच्चों की सुरक्षा से जुड़े जोखिमों की पहचान करने, संकट में रह रहे बच्चों को सरकारी योजनाओं और सेवाओं से जोड़ने तथा किसी भी संदिग्ध स्थिति की जानकारी तत्काल सक्षम अधिकारियों तक पहुंचाने का काम करेंगी।

समितियों को जांच और कानूनी कार्रवाई का अधिकार नहीं

आयोग अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित समितियों की भूमिका जागरूकता, सामुदायिक सहयोग और समय पर सूचना देने तक सीमित रहेगी। किसी अपराध की जांच करना, संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई करना या कानूनी प्रक्रिया पूरी करना पुलिस और अन्य सक्षम सरकारी एजेंसियों का ही अधिकार होगा। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए परिवार के साथ-साथ पड़ोस और समाज की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। बदलती सामाजिक परिस्थितियों और एकल परिवारों के बढ़ते चलन के बीच सामुदायिक जिम्मेदारी को मजबूत करने की आवश्यकता है।

पीड़ित बच्चों की पहचान उजागर न करने की अपील

डॉ. शर्मा ने आम नागरिकों और मीडिया प्रतिनिधियों से बच्चों के खिलाफ अपराध से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि पीड़ित बच्चे का नाम, तस्वीर, पता, परिवार की पहचान या ऐसी कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए, जिससे उसकी पहचान उजागर हो सके। उन्होंने पॉक्सो अधिनियम की धारा 23 और किशोर न्याय अधिनियम की धारा 74 के प्रावधानों का पालन करने पर जोर दिया। डॉ. शर्मा ने कहा कि बाल सुरक्षा किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। परिवार, समाज, प्रशासन और जागरूक नागरिकों को मिलकर ऐसा वातावरण तैयार करना होगा, जहां हर बच्चा सुरक्षित रह सके, उसकी शिक्षा प्रभावित न हो और उसे भयमुक्त माहौल में बचपन जीने का अवसर मिले।
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