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Technical issues in the PBF app  (Image Source: AI Photo)
Technical issues in the PBF app (Image Source: AI Photo)
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Digital Girdawari: 100 करोड़ की डिजिटल गिरदावरी योजना विवादों में, कंपनी काम छोड़ भागी, निजी लिंक वाले ऐप से उठ रहे सुरक्षा पर सवाल

Digital Girdawari: छत्तीसगढ़ में डिजिटल गिरदावरी के लिए इस्तेमाल हो रहे पीबीएफ ऐप में सर्वर, फोटो अपलोड और लोकेशन रिकॉर्डिंग से जुड़ी समस्याओं की शिकायतें सामने आई हैं। निजी एपीके लिंक से ऐप डाउनलोड कराने और परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारियों ने तकनीकी सुधार और जवाबदेही तय करने की जरूरत बताई है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 20 Oct 2026, 10:45 AM · 3 मिनट पढ़ने का समय
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Digital Girdawari: छत्तीसगढ़ में धान के वास्तविक रकबे के सटीक आकलन के लिए शुरू की गई डिजिटल गिरदावरी (फसल सत्यापन) योजना ही अब भारी तकनीकी और प्रशासनिक गड़बड़ियों के चक्रव्यूह में फंस गई है। राज्य के राजस्व विभाग द्वारा करीब दो साल पहले रामटेक सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस नाम की कंपनी को 100 करोड़ रुपये का ठेका सौंपा गया था, लेकिन कंपनी पर आरोप है कि वह एक साल भी काम ठीक से पूरा किए बिना परियोजना अधर में छोड़कर गायब हो गई। अब हालत यह है कि मैदान में तैनात पटवारियों और सर्वेयरों से गूगल प्ले स्टोर के बजाय निजी (प्राइवेट) एपीके लिंक के जरिए ऐप डाउनलोड कराया जा रहा है। इस ऐप को फोन में इंस्टॉल करते समय 'हार्मफुल सॉफ्टवेयर' (हानिकारक ऐप) का अलर्ट आ रहा है, जिससे मैदानी कर्मचारियों में सुरक्षा को लेकर भारी चिंता और आक्रोश है।

सर्वर ठप, समय की बर्बादी और डेटा की विश्वसनीयता पर उठते सवाल

फसल सर्वे के लिए इस्तेमाल हो रहे पीबीएफ (फिजिकल वेरिफिकेशन) ऐप की कार्यप्रणाली बेहद लचर है। मैदानी कर्मचारियों की शिकायत है कि:

  • ऐप का सर्वर बार-बार ठप (डाउन) हो जाता है।

  • खेतों की तस्वीरें समय पर अपलोड नहीं हो पातीं।

  • ऐप सही लोकेशन (अक्षांश-देशांतर) दर्ज करने में लगातार त्रुटि दिखा रहा है।

खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के तहत राज्य में धान के कुल रकबे का सटीक आकलन इसी डिजिटल सर्वे के आंकड़ों पर आधारित होना है। ऐसे में जब खुद डिजिटल व्यवस्था ही ध्वस्त नजर आ रही है, तो आने वाले समय में सरकारी आंकड़ों की शुद्धता और विश्वसनीयता पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है।

सर्वेयरों से मांगी जा रही जटिल जानकारियां, काम का बढ़ा बोझ

नए सर्वे नियम के तहत पटवारियों और सर्वेयरों को खेत के चारों कोनों का लैटिट्यूड-लॉन्गीट्यूड (Latitude-Longitude) दर्ज करना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा:

  1. किसान ने धान की कौन-सी किस्म बोई है, इसका विवरण देना है।

  2. बीज कहां से खरीदा गया, इसका प्रमाण जुटाना है।

  3. खरीदे गए बीज के बोरे पर दर्ज रेफरेंस नंबर के आधार पर बीज की प्रमाणिकता का भौतिक सत्यापन करना है।

जब ऐप का सर्वर ही सही से काम नहीं कर रहा, तब इतनी जटिल प्रक्रिया पूरा करने में मैदानी अमले का काफी समय और ऊर्जा नष्ट हो रही है।

जवाबदेही तय करने की मांग 

करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद राजस्व विभाग की यह महत्वाकांक्षी योजना अब पटवारियों के लिए गले की फांस बन गई है। विशेषज्ञों और कर्मचारी संगठनों का मानना है कि यदि समय रहते तकनीकी खामियों को दूर नहीं किया गया और ठेका कंपनी की जवाबदेही तय नहीं की गई, तो धान खरीदी और फसल गिरदावरी का पूरा ढांचा चरमरा सकता है।

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