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People protesting over the PoK issue (Image Source: social media)
People protesting over the PoK issue (Image Source: social media)
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PoK Protest: संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) के बाहर गूंजी पीओके की आवाज, मानवाधिकार हनन पर पाक सेना के खिलाफ सड़कों पर उतरे कश्मीरी

PoK Protest: न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर कश्मीरी समुदाय के लोगों ने PoK में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जांच और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा की मांग उठाई।

कीर्तिमान न्यूज | अप्पू धीवर
प्रकाशित: 28 Sep 2026, 02:56 PM · 3 मिनट पढ़ने का समय
न्यूयॉर्क
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
PoK Protest: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में महीनों से जारी उथल-पुथल अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर आ पहुंची है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के उच्चस्तरीय सत्र के दौरान न्यूयॉर्क स्थित यूएन मुख्यालय के बाहर कश्मीरी समुदाय के लोगों ने पाकिस्तानी सेना और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। हाथों में पोस्टर थामे प्रदर्शनकारियों ने पीओके में मानवाधिकारों के खुले उल्लंघन पर गहरी चिंता जताई और पूरे मामले की निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जांच कराने की पुरजोर मांग की।

सुरक्षा बलों के दमन चक्र पर भड़का आक्रोश 

प्रदर्शन में शामिल लोगों ने आरोप लगाया कि पीओके में लगातार निर्दोष नागरिकों की हत्याएं हो रही हैं, लोगों को जबरन गायब किया जा रहा है और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की गैर-कानूनी गिरफ्तारियां की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सुरक्षा बल और सरकारी तंत्र अब महिलाओं तथा बच्चों को भी निशाना बनाने से बाज नहीं आ रहे। ऐसे माहौल में जब तक किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराकर दोषियों की जवाबदेही तय नहीं की जाती, तब तक वहां के लोगों को न्याय मिलना असंभव है।

पीओके से तुरंत हटाए जाएं पाक सुरक्षा बल

यूएन परिसर के बाहर जुटे प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में से एक पीओके से पाकिस्तानी फौज और अन्य सुरक्षा बलों को तुरंत वापस बुलाना है। उनका स्पष्ट कहना था कि जब तक बंदूक के साये में लोग जीने को मजबूर रहेंगे, तब तक हालात कभी सामान्य नहीं हो सकते। सुरक्षा बलों की मौजूदगी में नागरिक भयमुक्त होकर अपनी बात तक नहीं रख सकते। प्रदर्शनकारियों ने संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक समुदाय से हस्तक्षेप कर स्थानीय नागरिकों के मूलभूत अधिकारों की रक्षा करने की अपील की।

वैश्विक राजनयिकों का ध्यान खींचने की कोशिश 

यह विरोध-प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब दुनियाभर के राष्ट्राध्यक्ष, वरिष्ठ राजनयिक और प्रतिनिधि यूएन असेंबली के वार्षिक सत्र के लिए न्यूयॉर्क में मौजूद हैं। वैश्विक कूटनीति के इस सबसे बड़े केंद्र के बाहर हुए इस प्रदर्शन ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और दुनिया भर के नेताओं का ध्यान पीओके की बिगड़ती स्थिति की तरफ खींचने का काम किया है।

महंगाई के विरोध से शुरू हुआ था जनाक्रोश, अब उठी आजादी की मांग 

गौरतलब है कि पीओके में पिछले करीब चार महीनों से राजनीतिक और सामाजिक माहौल बेहद तनावपूर्ण है। इस साल जून में पीओके विधानसभा में शरणार्थियों के लिए आरक्षित सीटों और बेकाबू महंगाई के खिलाफ स्थानीय लोगों ने आवाज उठाई थी। हालांकि, शहबाज शरीफ सरकार और जनरल अससीम मुनीर के नेतृत्व वाली पाक सेना ने बातचीत के बजाय बलप्रयोग कर आंदोलन को कुचलने का रास्ता चुना, जिससे आग में घी का काम हुआ। वर्तमान में 'ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) के नेतृत्व में चल रहा यह प्रदर्शन अब बुनियादी सहूलियतों से आगे बढ़कर सीधे पाकिस्तानी कब्जे से मुक्ति की मांग तक पहुंच चुका है, जिसने इस्लामाबाद की चिंताएं काफी बढ़ा दी हैं।
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