पेपर लीक पर नकेल कसने की तैयारी : जंतर-मंतर के हंगामे के बाद एक्शन में सरकार, आज राज्यसभा में पेश होगा लोक परीक्षा बिल
पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली रोकने के लिए केंद्र सरकार का लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक आज राज्यसभा में पेश होगा। लोकसभा से मंजूरी मिलने के बाद अब उच्च सदन में इसकी परीक्षा होगी। बिल में पेपर लीक कराने वालों के लिए 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।
देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक के मामलों ने छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं के बड़े विरोध-प्रदर्शन और बवाल के बाद अब केंद्र सरकार पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रही है। भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने के इरादे से लाया गया 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक' लोकसभा से पास होने के बाद आज यानी गुरुवार (30 जुलाई) को राज्यसभा में पेश किया जाएगा। इससे पहले लोकसभा में इस बिल पर तीखी बहस देखने को मिली थी।
बिल पास कराने ज्यादा मशक्कत
विपक्षी नेताओं ने हालिया परीक्षा घोटालों, छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई और युवाओं के गुस्से को लेकर सरकार को घेरा। हालांकि, मैराथन चर्चा के बाद सदन ने इसे ध्वनि मत से मंजूरी दे दी थी। अब इस कानून की असली परीक्षा उच्च सदन यानी राज्यसभा में होनी है। राजनीतिक गणित की बात करें तो राज्यसभा में सरकार को इस बिल को पास कराने में ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी।
बहुमत का आंकड़ा: वर्तमान में उच्च सदन की प्रभावी क्षमता 242 सदस्यों की है। किसी भी सामान्य कानून को पास कराने के लिए 122 वोट की जरूरत होती है।
NDA की स्थिति: बीजेपी नीत एनडीए गठबंधन के पास करीब 152 सांसदों का मजबूत समर्थन है।
विपक्ष की ताकत: कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के पास लगभग 63 सीटें हैं, जबकि अन्य तटस्थ या निर्दलीय दलों के पास 29 सांसद हैं।
संख्याबल के इस गणित से साफ है कि यदि पूरा विपक्ष एकजुट होकर वोटिंग भी करता है, तब भी सरकार आसानी से इस विधेयक को पास कराने की स्थिति में है।
छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले माफियाओं पर नकेल कसने के लिए इसमें बेहद सख्त सजा तय की गई है:
लंबी जेल की सजा: संगठित तरीके से पेपर लीक कराने या परीक्षा प्रक्रिया में सेंध लगाने वालों को 5 से 10 साल तक की सख्त कैद हो सकती है।
भारी-भरकम जुर्माना: दोषियों पर 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
छात्रों को क्या होगा फायदा?
सरकार का दावा है कि इस नए कानून के लागू होने से भर्ती परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा पूरी तरह खत्म होगा। इससे दिन-रात मेहनत करने वाले होनहार छात्रों का हक नहीं मारा जाएगा और देश की परीक्षा प्रणाली पर लोगों का भरोसा फिर से बहाल होगा। फिलहाल देश भर के लाखों छात्रों और युवाओं की नजरें आज राज्यसभा की कार्यवाही पर टिकी हैं।