Public Hearing Incident: कलेक्टर कार्यालय में आज आयोजित जनसुनवाई के दौरान एक युवक ने खुद पर केरोसिन डालकर आत्महत्या करने की कोशिश की। युवक अपने साथ केरोसिन लेकर प्रशासनिक संकुल के अंदर पहुंच गया था। हालांकि, मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने समय रहते उसे पकड़ लिया और एक बड़ा हादसा टल गया। घटना के बाद जहां युवक की शिकायत चर्चा में है, वहीं इससे भी बड़ा सवाल कलेक्टर कार्यालय की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर खड़ा हो गया है।
सुरक्षा जांच पर बड़ा सवाल
आखिर इतनी कड़ी सुरक्षा वाले प्रशासनिक परिसर में कोई व्यक्ति ज्वलनशील पदार्थ लेकर अंदर तक कैसे पहुंच गया, यह जांच का विषय बन गया है। केरोसिन लेकर प्रशासनिक संकुल में पहुंचने से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल कलेक्टर कार्यालय कोई सामान्य सार्वजनिक स्थान नहीं है।
यहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं और शिकायतें लेकर पहुंचते हैं। ऐसे में युवक का केरोसिन लेकर परिसर के अंदर पहुंच जाना सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामी की ओर इशारा करता है।
सवाल उठ रहे हैं कि प्रवेश द्वार पर आने वाले लोगों की कितनी सख्ती से जांच की जाती है।
क्या लोगों के बैग और सामान की पूरी जांच होती है?क्या किसी संदिग्ध तरल पदार्थ या ज्वलनशील सामग्री की पहचान के लिए कोई व्यवस्था मौजूद है?
अगर कोई व्यक्ति केरोसिन की जगह पेट्रोल, एसिड या कोई अन्य खतरनाक पदार्थ लेकर अंदर पहुंच जाए तो क्या उसे समय रहते रोका जा सकेगा?
युवक ने लगाया ठगी का आरोप
घटना के बाद प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने की जरूरत महसूस हो रही है। 11.20 लाख रुपए की धोखाधड़ी का लगाया आरोप जानकारी के मुताबिक, जामनिया खुर्द निवासी युवक आकाश एक धोखाधड़ी की शिकायत लेकर जनसुनवाई में पहुंचा था।
युवक का आरोप है कि शुभम और गोलू कुशवाहा नामक लोगों ने डीजे वाहन देने के नाम पर उसके साथ करीब 11.20 लाख रुपए की धोखाधड़ी की। आकाश के अनुसार, आरोपियों ने उससे 2 लाख रुपए नकद और कुछ कोरे चेक लिए थे।
गाड़ी सौदे को लेकर बढ़ा विवाद
जिस वाहन को दिखाकर सौदा किया गया था, उसकी जगह दूसरी गाड़ी दे दी गई। युवक का आरोप है कि उसे खराब डीजे सिस्टम भी दिया गया। युवक ने बताया कि नए सामान के नाम पर उससे करीब 2.10 लाख रुपए अतिरिक्त खर्च करवाए गए। इसके बाद भी 98 हजार रुपए की मांग की जाती रही और गाड़ी वापस लेने की धमकी दी गई।
आरोप है कि इसी विवाद और मानसिक परेशानी के चलते युवक ने जनसुनवाई में पहुंचकर आत्मदाह का प्रयास किया। प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती घटना के बाद अब प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है।
प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती
एक ओर युवक की शिकायत की निष्पक्ष जांच करना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर कलेक्टर कार्यालय की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना भी आवश्यक हो गया है। यह घटना इस बात की ओर इशारा करती है कि संवेदनशील सरकारी परिसरों में सुरक्षा जांच को केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रखा जा सकता। आने वाले समय में प्रशासनिक संकुल की सुरक्षा व्यवस्था में क्या बदलाव किए जाते हैं, यह देखने वाली बात होगी।

