Saudi Arabia Houthi Attack: सऊदी के तेल ठिकानों और हवाई अड्डों पर हूती का बड़ा हमला, 73 घायल
Saudi Arabia Houthi Attack: यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के दक्षिणी इलाकों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिसमें 73 लोग घायल हुए और कई अहम ठिकानों को नुकसान पहुंचा। हमले के बाद मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया है। विशेषज्ञों को आशंका है कि इसका असर बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य और वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ सकता है। वहीं, सऊदी-पाकिस्तान-तुर्की रक्षा समझौते के बावजूद विशेषज्ञों का कहना है कि यह NATO जैसी बाध्यकारी सैन्य व्यवस्था नहीं है, इसलिए पाकिस्तान और तुर्की के सीधे युद्ध में उतरने की संभावना फिलहाल कम है।
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कीर्तिमान न्यूज
08 Sep 2026, 03:33 PM
रियाद
Saudi Arabia Houthi Attack: मध्य पूर्व की राजनीति एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर आ पहुंची है। यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के दक्षिणी इलाकों को निशाना बनाते हुए भीषण मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। सऊदी अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में कम से कम 73 लोग घायल हुए हैं और देश के कई प्रमुख तेल ठिकानों व यूटिलिटी सेंटरों में भीषण आग लग गई। यमन में सऊदी-समर्थित सरकारी बलों और हूती विद्रोहियों के बीच पिछले कुछ हफ्तों से रुक-रुक कर चल रही झड़पों ने आखिरकार चार साल से चले आ रहे संघर्ष-विराम को पूरी तरह तोड़ दिया है। पहले से ही करीब तीन सालों के क्षेत्रीय तनाव से जूझ रही वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए यह हमला एक और बड़ा झटका माना जा रहा है।
सबसे अहम जलमार्ग
हूती और सऊदी अरब के बीच फिर से शुरू हुई इस जंग का सबसे बुरा असर बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य (Bab el-Mandeb Strait) पर पड़ने की आशंका है। यह मार्ग अरब प्रायद्वीप के रास्ते वैश्विक व्यापार और क्रूड ऑयल की आवाजाही के लिए बेहद रणनीतिक माना जाता है। इसके अलावा, ईरान युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली शिपिंग पहले से ही लगभग ठप्प पड़ी है, जो दुनिया के कुल तेल का लगभग पांचवां हिस्सा ले जाने वाला सबसे अहम जलमार्ग है।
मिसाइल हमले के बाद बढ़ा मध्य पूर्व तनावविद्रोहियों ने ली हमले की जिम्मेदारी
ऐसे में बाब अल-मंदेब में रुकावट आने से दुनियाभर में ईंधन की कीमतें आसमान छू सकती हैं। उत्तरी यमन और घनी आबादी वाले इलाकों पर नियंत्रण रखने वाले हूती विद्रोहियों ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया है कि उन्होंने निशाना बनाकर सटीक वार किए हैं। गठबंधन सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-माल्की ने बताया कि मंगलवार तड़के हुए इन हमलों में सीमा से सटे प्रमुख सऊदी शहरों—आभा, जाज़ान, नज्रान और खमीस मुशैत को निशाना बनाया गया।
हूती विद्रोहियों के मुताबिक, उनके निशाने पर मुख्य रूप से:
आभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट
किंग खालिद एयर बेस
आभा और जिजान स्थित सरकारी तेल कंपनी अरामको (Aramco) के ठिकाने शामिल थे।
क्या पाकिस्तान और तुर्की करेगी कार्रवाई
सऊदी अरब पर हुए इस हमले के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या पाकिस्तान और तुर्की भी इस युद्ध में घसीटे जाएंगे? दरअसल, पिछले महीने 7 अगस्त को पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच 'मक्का डिफेंस पैक्ट' हुआ था। ऐसे में कयास लगाए जा रहे थे कि सऊदी पर हमला होने की स्थिति में क्या पाकिस्तान और तुर्की इसे अपने ऊपर हमला मानकर जवाबी कार्रवाई करेंगे? हालांकि, संकट की इस घड़ी में मक्का पैक्ट के साझेदारों की ओर से फिलहाल चुप्पी देखी जा रही है। साउथ एशियन मामलों के विश्लेषक माइकल कुगेलमैन ने 'अटलांटिक काउंसिल' में लिखे अपने लेख में स्पष्ट किया है कि इस समझौते को NATO जैसे सैन्य गठबंधन के रूप में देखना जल्दबाजी होगी।
"यह समझौता NATO जैसा कोई बाध्यकारी सैन्य गठबंधन नहीं है और न ही यह किसी नए क्षेत्रीय ब्लॉक के बनने का संकेत देता है। हालांकि, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि यह बेअसर है।" — माइकल कुगेलमैन
क्या कहते है एक्सपर्ट्स
कुगेलमैन के अनुसार, सऊदी अरब का पाकिस्तान के साथ सितंबर 2025 से आपसी रक्षा समझौता है, और वह साल 2000 से 'गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल' (GCC) के छह देशों के साथ सामूहिक रक्षा प्रणाली का हिस्सा भी रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन तमाम समझौतों के बावजूद, इसमें NATO के 'आर्टिकल 5' की तरह स्वचालित सैन्य प्रतिक्रिया (Automatic Military Response) का कोई प्रावधान नहीं है। इसका सीधा मतलब यह है कि हूती विद्रोहियों के हमलों का जवाब देने के लिए पाकिस्तानी फाइटर जेट्स या सैनिक सीधे युद्ध के मैदान में नहीं उतरेंगे। हालांकि, रक्षा विश्लेषकों का यह भी कहना है कि पाकिस्तान पूरी तरह हाथ पर हाथ धरकर नहीं बैठा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुरक्षा और रक्षा समझौतों के तहत पाकिस्तान ने सऊदी अरब की सरजमीं पर अपने लगभग 8,000 सैनिक, फाइटर जेट्स, ड्रोन और एयर-डिफेंस सिस्टम पहले से तैनात कर रखे हैं, जो वहां की आंतरिक सुरक्षा में सहयोग दे रहे हैं।