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सड़क निर्माण में तालाब की मिट्टी के इस्तेमाल का आरोप
सड़क निर्माण में तालाब की मिट्टी के इस्तेमाल का आरोप
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राजिम सड़क निर्माण विवाद : शीतला तालाब की मिट्टी से बन रही करोड़ों की सड़क, गुणवत्ता और नियमों पर उठे सवाल

राजिम में शीतला तालाब सौंदर्यीकरण से निकली मिट्टी के इस्तेमाल को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि 36 करोड़ रुपये की लागत से बन रही सड़क में तालाब की मिट्टी का उपयोग किया गया, जबकि सड़क निर्माण में Selected Soil के मानकों का पालन जरूरी होता है। मामले को लेकर निर्माण गुणवत्ता और नियमों पर सवाल उठ रहे हैं।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 16 Jul 2026, 11:02 AM · अपडेट: 14 Sep 2026, 04:11 PM
गरियाबंद
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
धर्म नगरी राजिम में नगर पालिका और लोक निर्माण विभाग (PWD) के बीच तालमेल इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। मामला शीतला तालाब के सौंदर्यीकरण और करोड़ों रुपये की लागत से बन रही सड़क से जुड़ा है। आरोप है कि तालाब गहरीकरण से निकली मिट्टी को सड़क निर्माण में इस्तेमाल कर लिया गया, जबकि दोनों परियोजनाओं के लिए अलग-अलग मापदंड तय किए गए थे। 
शीतला तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए करीब 1 करोड़ रुपये और पुराने मेला स्थल से नए मेला स्थल को जोड़ने वाली सड़क के लिए लगभग 36 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। ऐसे में दोनों विभागों के निर्माण कार्यों में हुए इस तालमेल को जहां कुछ लोग अनोखी पहल बता रहे हैं, वहीं निर्माण गुणवत्ता और नियमों को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। 

निर्माणाधीन सड़क में इस्तेमाल हुई तालाब की मिट्टी

नियमों के अनुसार किसी विभाग की संपत्ति या निर्माण कार्य से निकली सामग्री का उपयोग दूसरे विभाग के काम में बिना प्रक्रिया के नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद राजिम में शीतला तालाब से निकली मिट्टी का उपयोग सड़क निर्माण में किए जाने का मामला सामने आया है। नगर पालिका सीएमओ संतोष विश्वकर्मा का कहना है कि यह निर्णय पालिका के प्रतिनिधियों की सहमति से लिया गया। उन्होंने बताया कि तालाब गहरीकरण के लिए अलग से सरकारी मद का प्रावधान नहीं था। तालाब में फाउंटेन और लाइटिंग जैसे कार्यों के लिए अधिक गहराई और पानी की जरूरत थी, इसलिए गहरीकरण के लिए निकली मिट्टी का उपयोग किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि सड़क निर्माण करने वाली कंपनी तालाब के पास 15 से 20 मीटर ऊंची दो पचरी (सीढ़ीनुमा घाट) का निर्माण भी करेगी, इसी सहयोग के आधार पर मिट्टी उपलब्ध कराई गई।

कम खर्च में मिट्टी मिलने से उठे गुणवत्ता पर सवाल

राजिम में संगम तट से होते हुए पुराने मेला स्थल को नए मेला स्थल से जोड़ने के लिए करीब 3 किलोमीटर लंबी पक्की और चौड़ी सड़क बनाई जा रही है। इस परियोजना के लिए 36 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। सड़क निर्माण के अर्थवर्क में नियमों के मुताबिक चयनित मिट्टी (Selected Soil) का उपयोग किया जाना था। लेकिन आरोप है कि सड़क किनारे मौजूद शीतला तालाब से निकली मिट्टी को ही भराव कार्य में इस्तेमाल कर लिया गया। स्थानीय स्तर पर इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं कि तालाब की मिट्टी मिलने से ठेकेदार को ढुलाई का खर्च कम करना पड़ा और अर्थवर्क भी कम लागत में पूरा हो गया, लेकिन इसका असर सड़क की मजबूती पर पड़ सकता है। 

सड़क निर्माण में क्यों जरूरी होती है Selected Soil

सड़क निर्माण में हर प्रकार की मिट्टी का उपयोग नहीं किया जाता। इंजीनियरिंग मानकों के अनुसार सड़क की मजबूती के लिए विशेष गुणवत्ता वाली मिट्टी का चयन किया जाता है, जिसे Selected Soil कहा जाता है। PWD और IRC के मानकों के अनुसार इस मिट्टी में CBR Value 8 प्रतिशत से अधिक, Plasticity Index 6 प्रतिशत से कम होना चाहिए। इसके अलावा मिट्टी में अधिक फूलने-सिकुड़ने की क्षमता, जैविक पदार्थ और बड़े पत्थर नहीं होने चाहिए। आमतौर पर लाल मुरम, पीली मिट्टी, रेत और छोटे कंकड़ वाली मिश्रित मिट्टी सड़क निर्माण के लिए बेहतर मानी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्षों तक पानी में रहने वाली तालाब की मिट्टी सड़क निर्माण के लिए उपयुक्त नहीं होती। ऐसी मिट्टी में नमी अधिक होती है और दबाव सहने की क्षमता कम हो सकती है। राजिम में बारिश के बाद सड़क किनारे कटाव और जगह-जगह बन रहे गड्ढों ने निर्माण गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का दावा है कि नदी तट के पास हो रहे इस निर्माण में यदि तय मानकों के अनुसार Selected Soil का इस्तेमाल नहीं किया गया, तो भविष्य में सड़क की मजबूती प्रभावित हो सकती है।

नियमों और गुणवत्ता की जांच की जरूरत 

तालाब सौंदर्यीकरण और सड़क निर्माण के बीच हुए इस तालमेल को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। जहां एक ओर विभाग इसे आपसी सहयोग का उदाहरण बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर निर्माण सामग्री और तकनीकी मानकों की अनदेखी को लेकर जांच की मांग भी उठ रही है। अब देखने वाली बात होगी कि संबंधित विभाग सड़क की गुणवत्ता को लेकर क्या कदम उठाते हैं और क्या निर्माण कार्य तय मानकों के अनुसार पूरा किया जाता है।
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