झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर छात्रों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। राजधानी रांची में पिछले 12 दिनों से जारी आंदोलन अब और तेज हो गया है। धरने और सत्याग्रह के बाद अब छात्र संगठनों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने के मकसद से छात्रों ने अब 10 अगस्त की जगह 7 अगस्त को ही 'विधानसभा मार्च' करने का बड़ा ऐलान कर दिया है। दूसरी ओर, इस आंदोलन की अगुवाई कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।
सेहत पर रखी जा रही नजर
भोजन त्यागने की वजह से उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही है। मौके पर मौजूद डॉक्टरों की टीम उनकी सेहत पर पल-पल नजर रखे हुए है। गिरते स्वास्थ्य के बावजूद देवेंद्र महतो अपनी जिद पर अड़े हैं। उनका साफ कहना है कि जब तक अभ्यर्थियों के हक में कोई ठोस और लिखित फैसला नहीं आता, तब तक यह अनशन और सत्याग्रह खत्म नहीं होगा। सड़कों पर उतरे छात्रों का कहना है कि पूरी भर्ती प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर गड़बड़ियां हुई हैं।
आंदोलन को किसी राजनीतिक दल से ना जोड़े
व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार को बिना किसी देरी के सख्त कदम उठाने चाहिए। आंदोलनकारियों की सबसे प्रमुख मांग यह है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी जाए। छात्र नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया है कि उनके इस आंदोलन को किसी राजनीतिक चश्मे से न देखा जाए। यह प्रदर्शन किसी दल के पक्ष या विपक्ष में नहीं, बल्कि राज्य के लाखों युवाओं के भविष्य और एक पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की बहाली के लिए है।मामले को लेकर सरकार संवेदनलशील
अभ्यर्थियों का कहना है कि वे किसी के विरोधी नहीं हैं, बल्कि सिर्फ उस जर्जर सिस्टम में सुधार चाहते हैं जो बार-बार उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करता है। छात्रों के बढ़ते आक्रोश के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का बयान भी सामने आया है। सीएम ने कहा है कि सरकार अभ्यर्थियों की चिंताओं को लेकर बेहद गंभीर और संवेदनशील है। जांच एजेंसियां इस पूरे मामले की गहनता से पड़ताल कर रही हैं।
दोषी ने बख्शा नहीं जाएगा
मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि जांच रिपोर्ट सामने आते ही तथ्यों के आधार पर सख्त फैसला लिया जाएगा और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार संवैधानिक और कानूनी दायरे में रहकर युवाओं की जायज मांगों का समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। पहले छात्र संगठनों ने 10 अगस्त को प्रदर्शन की रूपरेखा तय की थी, लेकिन सरकार के रुख को देखते हुए इसे प्रीपोन करके 7 अगस्त कर दिया गया है।7 अगस्त को बड़ा प्रदर्शन
छात्र नेताओं के मुताबिक, 7 अगस्त का विधानसभा मार्च पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन वे प्रणालीगत सुधार और जवाबदेही तय होने तक पीछे हटने वाले नहीं हैं। अब पूरी नजर राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी है कि क्या सरकार 7 अगस्त के मार्च से पहले छात्रों को वार्ता के लिए बुलाती है या फिर रांची की सड़कों पर एक बार फिर बड़ा शक्ति प्रदर्शन देखने को मिलेगा।