लाल सागर में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने यमन के तटीय शहर होदैदाह में हूती विद्रोहियों के सैन्य ठिकानों पर जोरदार हवाई हमले किए हैं। यह कार्रवाई लाल सागर में सऊदी अरब के तेल टैंकरों पर हुए हालिया हमलों के जवाब में की गई है। इस ताजा सैन्य गतिविधि ने पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में एक बार फिर से एक बड़े युद्ध के खतरे को हवा दे दी है। सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मल्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि गठबंधन सेना ने होदैदाह प्रांत में हूती मिलिशिया के वैध सैन्य ढांचों को निशाना बनाकर उचित जवाबी कार्रवाई की है।
क्यों भड़का यह विवाद?
हाल ही में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर से गुजर रहे सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों को निशाना बनाया था। इनमें से एक हमले की पुष्टि सऊदी अधिकारियों ने भी की थी। इसके तुरंत बाद हूतियों ने लाल सागर में सऊदी जहाजों की आवाजाही रोकने और नाकेबंदी करने का ऐलान किया था। इस धमकी के जवाब में सऊदी अरब ने भी सख्त कदम उठाने की चेतावनी दी थी, जिसके नतीजे के रूप में ये हवाई हमले देखने को मिले।

किन इलाकों को बनाया गया निशाना?
हूती विद्रोहियों द्वारा संचालित 'अल-मसीराह टीवी' के अनुसार:
हमलों का मुख्य केंद्र लाल सागर से सटा बंदरगाह शहर होदैदाह रहा।
यहाँ स्थित सरकारी टेलीकॉम कंपनी की इमारतों और सुविधाओं को भारी नुकसान पहुँचा है।
यमन के पश्चिमी तट के पास मौजूद कामरान द्वीप पर भी बमबारी की गई।
कमर्शियल जहाजों की आवाजाही पर रोक नहीं
हालाँकि, स्थानीय निवासियों का दावा है कि होदैदाह बंदरगाह पर भी मिसाइलें गिरी हैं, लेकिन सऊदी गठबंधन ने बंदरगाह को सीधे निशाना बनाने से साफ इनकार किया है।गठबंधन सेना के प्रवक्ता अल-मल्की ने स्पष्ट किया कि यमन के सभी प्रमुख बंदरगाह—जैसे होदैदाह, रास इस्सा और सालिफ—कमर्शियल जहाजों की आवाजाही के लिए पूरी तरह खुले हैं।"हमने हवाई यातायात को सुचारू रखने के उद्देश्य से किसी भी एयरपोर्ट को निशाना नहीं बनाया है। हालाँकि, हूती विद्रोही खुद सना इंटरनेशनल एयरपोर्ट से फ्लाइट्स का संचालन नहीं होने दे रहे हैं। सऊदी अरब अपने जहाजों, नागरिकों और व्यापारिक हितों की सुरक्षा के लिए जो भी जरूरी होगा, आगे भी करता रहेगा।"- अल-मल्की
शांतिपूर्ण दौर के बाद सीधा टकराव
यह घटना इसलिए बेहद चिंताजनक है क्योंकि साल 2022 में दोनों पक्षों के बीच हुए एक अनौपचारिक समझौते के बाद से सीधी और बड़ी सैन्य झड़पें लगभग थम गई थीं। पिछले दो-तीन सालों के शांतिपूर्ण दौर के बाद सऊदी गठबंधन और हूतियों के बीच यह पहला बड़ा सीधा टकराव है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर लाल सागर में यह तनातनी तुरंत नहीं रुकी, तो पूरे मिडिल ईस्ट में एक बार फिर जंग की भयंकर आग भड़क सकती है।