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अस्पताल में भी अनशन पर रहे सोनम वांगचुक
अस्पताल में भी अनशन पर रहे सोनम वांगचुक
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अनशन तोड़ने से मना : सोनम वांगचुक की तबीयत नाजुक, डॉक्टरों की सलाह के बावजूद इलाज लेने से इनकार

सोनम वांगचुक 20 दिनों के आमरण अनशन के बाद तबीयत बिगड़ने पर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं। डॉक्टरों की सलाह के बावजूद उन्होंने ORS, ड्रिप और अन्य मेडिकल फ्लूइड लेने से इनकार कर दिया है। एम्स और सफदरजंग के विशेषज्ञ उनकी लगातार निगरानी कर रहे हैं।

प्रकाशित: 19 Jul 2026, 08:38 AM · अपडेट: 01 Aug 2026, 02:25 AM
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
लद्दाख की मांगों को लेकर देश की राजधानी में चल रहा आंदोलन अब एक बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच गया है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 20 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ने के बाद पुलिस ने उन्हें धरना स्थल से उठा लिया है। वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया है, लेकिन लद्दाख के हक की लड़ाई अस्पताल के बिस्तर से भी जारी है। उन्होंने अस्पताल में भी अपना अनशन तोड़ने से साफ मना कर दिया है।

अस्पताल में भी जारी उपवास  

सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि वांगचुक को जबरन अस्पताल ले जाया गया है, लेकिन वे अपने संकल्प पर अडिग हैं और वहां भी उनका उपवास जारी है। दूसरी ओर, सफदरजंग अस्पताल प्रशासन की टीम लगातार उनकी सेहत पर नजर बनाए हुए है। अस्पताल की मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. चारू बांबा ने वांगचुक की मेडिकल स्थिति साझा करते हुए बताया: "सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह करीब 7:30 बजे अस्पताल लाया गया था। वे पूरी तरह होश में हैं और हर बात को समझ रहे हैं। 

शरीर में पानी की कमी 

राहत की बात यह है कि फिलहाल उनके वाइटल्स (ब्लड प्रेशर, पल्स रेट और ऑक्सीजन लेवल) स्थिर हैं। लेकिन लगातार भूखे-प्यासे रहने के कारण उनके शरीर में पानी की गंभीर कमी (डिहाइड्रेशन) देखी जा रही है, जिसके लिए तुरंत इलाज जरूरी है।" डॉक्टरों के मुताबिक, वांगचुक को लगातार समझाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन वे किसी भी तरह की मेडिकल मदद लेने को तैयार नहीं हैं। वे न तो मुंह से ओआरएस (ORS) या कोई इलेक्ट्रोलाइट घोल ले रहे हैं और न ही ड्रिप (IV थेरेपी) चढ़वाने की अनुमति दे रहे हैं।

सोनम वांगचुक
डॉक्टरों की टीम रख रही निगरानी 

मामले की गंभीरता और हाई कोर्ट के निर्देशों को देखते हुए सफदरजंग के डॉक्टरों के साथ अब एम्स (AIIMS) के इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. अक्षय कुमार को भी शामिल किया गया है। दोनों ही अस्पतालों के डॉक्टरों की संयुक्त टीम ने वांगचुक की जांच की है और माना है कि उन्हें तुरंत मेडिकल फ्लूइड्स की जरूरत है। डॉक्टरों की टीम हर पल उनकी निगरानी कर रही है और उन्हें मनाने का प्रयास जारी है। 

गीतांजिल ने लोगों से की अपील

इस मुश्किल घड़ी में सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो अस्पताल में ही उनके साथ मौजूद हैं। उन्होंने बेहद भावुक होते हुए देश की जनता से एक खास अपील की है। गीतांजलि ने कहा कि लद्दाख के भविष्य को बचाने की इस मुहिम में लोग वांगचुक के साथ खड़े हों, उनके समर्थन में आवाज बुलंद करें और उनकी अच्छी सेहत के लिए प्रार्थना करें। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गतिरोध को कैसे सुलझाता है, क्योंकि 20 दिनों के कड़े उपवास के बाद वांगचुक के शरीर पर इसका असर साफ दिखने लगा है, जबकि लद्दाख के अधिकारों के लिए उनका हौसला अब भी डिगा नहीं है।
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