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महासमुंद

सरकारी स्कूल की बदली तस्वीर : रविवार को भी पढ़ने पहुंचते हैं बच्चे, प्राइवेट स्कूल छोड़ यहां ले रहे दाखिला

महासमुंद जिले के सरायपाली ब्लॉक स्थित दर्राभाठा शासकीय प्राथमिक शाला शिक्षा का प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभरी है। स्मार्ट टीवी और एआई आधारित पढ़ाई के कारण बच्चे रविवार को भी स्कूल पहुंचकर पढ़ाई करते हैं।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
24 Jun 2026, 06:32 PM
महासमुंद

महासमुंद जिले के सरायपाली विकासखंड का एक छोटा सा सरकारी स्कूल आज शिक्षा के क्षेत्र में मिसाल बन गया है। ग्राम दर्राभाठा स्थित शासकीय प्राथमिक शाला ने यह साबित कर दिया है कि यदि शिक्षक समर्पित हों और पढ़ाई को बच्चों के लिए रोचक बनाया जाए, तो सरकारी स्कूल भी किसी निजी संस्थान से कम नहीं होते। आमतौर पर रविवार को स्कूलों में सन्नाटा पसरा रहता है, लेकिन दर्राभाठा के इस स्कूल में नजारा बिल्कुल अलग दिखाई देता है। छुट्टी के दिन भी बच्चे अपने टिफिन के साथ स्कूल पहुंचते हैं और उत्साह के साथ पढ़ाई करते हैं। यही वजह है कि आसपास के कई गांवों के अभिभावक अब अपने बच्चों का नाम निजी स्कूलों से कटवाकर यहां दाखिला दिला रहे हैं। वर्तमान में स्कूल में 70 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इस बदलाव की शुरुआत वर्ष 2022 में हुई, जब प्रधान पाठक दयासागर नायक ने विद्यालय की जिम्मेदारी संभाली। उस समय बच्चों की शैक्षणिक स्थिति काफी कमजोर थी। कई छात्र अपनी कक्षा के स्तर के अनुरूप पढ़ने-लिखने में सक्षम नहीं थे। ऐसे में प्रधान पाठक दयासागर नायक और सहायक शिक्षिका डिमेश चौहान ने विद्यालय को नई दिशा देने का संकल्प लिया। शुरुआती दौर में बच्चों और अभिभावकों की पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए दयासागर नायक ने स्वयं के खर्च से करीब 10 हजार रुपये की राशि लगाई। उन्होंने विद्यार्थियों को जूते, मोजे, टाई और बेल्ट उपलब्ध कराए। इस पहल का सकारात्मक असर देखने को मिला और अभिभावकों का भरोसा स्कूल पर बढ़ने लगा। धीरे-धीरे बच्चों की नियमित उपस्थिति बढ़ी और पढ़ाई का माहौल तैयार हुआ। प्रधान पाठक का कहना है कि आज स्थिति यह है कि छोटे वर्गों के बच्चे भी अपनी उम्र और कक्षा से आगे की पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। कई विद्यार्थियों ने प्रवेश परीक्षाओं में भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

स्मार्ट टीवी और एआई की मदद 

विद्यालय में बच्चों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से पढ़ाया जा रहा है। कक्षाओं में स्मार्ट टीवी, कंप्यूटर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित शिक्षण सामग्री का उपयोग किया जाता है। पढ़ाई को खेल और गतिविधियों से जोड़ने के कारण बच्चों की सीखने में रुचि लगातार बढ़ रही है। स्कूल का समय सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक रखा गया है। खास बात यह है कि छुट्टी होने के बाद भी कई बच्चे कुछ देर और पढ़ने की इच्छा जताते हैं। शिक्षकों के अनुसार बच्चों में सीखने का उत्साह ही इस विद्यालय की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

युवा भी निभा रहे जिम्मेदारी

विद्यालय की सफलता में गांव के लोगों की भागीदारी भी अहम है। गांव के चार शिक्षित युवा प्रतिदिन स्वेच्छा से स्कूल पहुंचकर बच्चों को पढ़ाने में सहयोग करते हैं। इसके अलावा गणित प्रतियोगिता, स्पीड रीडिंग, योग, चित्रकला और रंगोली जैसी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

तीन साल में 24 बच्चों का चयन

लगातार मेहनत और बेहतर शैक्षणिक वातावरण का परिणाम अब सामने आने लगा है। पिछले तीन वर्षों में विद्यालय के 24 विद्यार्थियों का चयन विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से सैनिक स्कूल, प्रयास आवासीय विद्यालय और नवोदय विद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में हुआ है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि सरकारी स्कूलों में इसी तरह की गुणवत्ता, अनुशासन और शिक्षकों का समर्पण देखने को मिले, तो शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव संभव है। दर्राभाठा का यह स्कूल आज उन तमाम सरकारी विद्यालयों के लिए प्रेरणा बन गया है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बेहतर शिक्षा देने का सपना देखते हैं।
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