छत्तीसगढ़ को टीबी मुक्त राज्य बनाने की दिशा में प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए मुख्य सचिव विकासशील ने बुधवार को मंत्रालय महानदी भवन में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत संचालित विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में विशेष रूप से ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’, बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम तथा प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान की प्रगति पर चर्चा की गई। मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य में टीबी रोगियों की शीघ्र पहचान और उपचार सुनिश्चित करने के लिए व्यापक स्तर पर जांच शिविर आयोजित किए जाएं। उन्होंने निर्देश दिया कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर अधिक से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की जाए। जांच के दौरान पाए जाने वाले मरीजों का तत्काल इलाज शुरू किया जाए ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
एक्स-रे मशीन और रेडियोग्राफरों
टीबी उन्मूलन अभियान को गति देने के लिए विकासशील ने सभी जिलों में आवश्यक स्वास्थ्य संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जांच केंद्रों में एक्स-रे मशीन, रेडियोग्राफर और अन्य जरूरी उपकरण पर्याप्त संख्या में उपलब्ध रहें ताकि मरीजों की जांच में किसी प्रकार की बाधा न आए।मुख्य सचिव ने कहा कि टीबी मरीजों की पहचान होते ही उनका उपचार शुरू किया जाना चाहिए। साथ ही, केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के तहत मरीजों को मिलने वाली पोषण सहायता और निर्धारित आर्थिक राशि समय पर उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि उपचार के साथ-साथ पोषण भी टीबी नियंत्रण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
टीबी मुक्त गांवों की जानकारी
आंगनबाड़ियों में बच्चों की अनिवार्य स्क्रीनिंग
बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत मुख्य सचिव ने सभी बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में प्रत्येक बच्चे की स्क्रीनिंग अनिवार्य रूप से की जाए। किसी भी प्रकार की बीमारी या स्वास्थ्य समस्या पाए जाने पर बच्चों को बेहतर उपचार के लिए बड़े अस्पतालों में रेफर किया जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि अस्पतालों में उपचार प्राप्त कर रहे बच्चों की ट्रैकिंग और फॉलोअप व्यवस्था को मजबूत किया जाए। स्वास्थ्य विभाग यह सुनिश्चित करे कि इलाज के बाद भी बच्चों के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी हो और उन्हें आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं लगातार मिलती रहें।
