रूस और तालिबान सरकार के बीच एक बड़ा रक्षा समझौता हुआ है, जिसने दक्षिण एशिया की सामरिक राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस अफगानिस्तान को एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम उपलब्ध कराने पर सहमत हो गया है। माना जा रहा है कि यह कदम पाकिस्तान के लिए चिंता बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। यह समझौता रूस की राजधानी मॉस्को में हुआ, जहां रूसी सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगु और तालिबान सरकार के कार्यवाहक रक्षा मंत्री मुल्ला मोहम्मद याकूब मुजाहिद मौजूद थे। दोनों पक्षों ने रक्षा सहयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए।
एयर डिफेंस सिस्टम
एयर डिफेंस सिस्टम किसी देश की हवाई सुरक्षा का सबसे अहम हिस्सा है, इसका उपयोग दुश्मन के लड़ाकू विमानों, मिसाइलों और ड्रोन को पहचानने और उन्हें मार गिराने के लिए किया जाता है। यदि तालिबान को आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम मिल जाता है, तो अफगानिस्तान की हवाई सुरक्षा पहले की तुलना में काफी मजबूत हो सकती है।
पाकिस्तान के लिए चिंता
पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान और तालिबान सरकार के संबंधों में कई बार तनाव देखने को मिला है सीमा पार आतंकी गतिविधियों को लेकर दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी होते रहे हैं। यदि अफगानिस्तान के पास उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम आ जाता है, तो पाकिस्तान के लिए अफगान सीमा के भीतर किसी भी तरह की हवाई कार्रवाई करना पहले से ज्यादा कठिन हो जाएगा। यही वजह है कि इस समझौते को इस्लामाबाद के लिए बड़ा रणनीतिक झटका माना जा रहा है।
सिर्फ एयर डिफेंस सिस्टम नहीं
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह समझौता केवल एयर डिफेंस सिस्टम तक सीमित नहीं है इसमें अन्य सैन्य उपकरणों और जमीनी हथियारों की आपूर्ति का भी प्रावधान शामिल है इसके अलावा रूस, तालिबान सरकार की सेना को प्रशिक्षण देने में भी मदद कर सकता है अभी तक दोनों देशों की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कौन-कौन से हथियार दिए जाएंगे और उनकी संख्या कितनी होगी।
लंबे समय से बातचीत
सूत्रों के अनुसार तालिबान सरकार पिछले काफी समय से रूस के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रही थी मुल्ला मोहम्मद याकूब की हालिया मॉस्को यात्रा के दौरान इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई और आखिरकार समझौते को अंतिम रूप दे दिया गया। अभी तक यह जानकारी सामने नहीं आई है कि रूस अफगानिस्तान को कौन-सा एयर डिफेंस सिस्टम देगा। यह भी स्पष्ट नहीं है कि समझौते में ड्रोन या अन्य आक्रामक हवाई हथियार शामिल हैं या नहीं।
रूस को फायदा
अफगानिस्तान के साथ बढ़ता रक्षा सहयोग रूस को मध्य एशिया में अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करने का मौका देगा। अमेरिका और नाटो सेनाओं की वापसी के बाद अफगानिस्तान में प्रभाव बढ़ाने के लिए रूस, चीन और अन्य क्षेत्रीय शक्तियां सक्रिय हैं। ऐसे में यह समझौता रूस की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
बदल सकते हैं क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण
इस समझौते का असर केवल रूस और अफगानिस्तान तक सीमित नहीं रहेगा। इसके प्रभाव पाकिस्तान, चीन, ईरान और अन्य पड़ोसी देशों की सुरक्षा नीतियों पर भी पड़ सकते हैं। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि रूस तालिबान को कौन-सी सैन्य तकनीक और उपकरण उपलब्ध कराता है। यदि यह समझौता पूरी तरह लागू होता है, तो आने वाले समय में दक्षिण और मध्य एशिया के सुरक्षा समीकरण बदल सकते हैं।
