दुर्ग पुलिस ने साइबर अपराध पर अंकुश लगाने के लिए जिले में चल रहे म्यूल अकाउंट (किराए पर दिए जाने वाले बैंक खातों) के नेटवर्क का बड़ा खुलासा किया है। जांच के दौरान अब तक 1149 से अधिक संदिग्ध बैंक खातों की पहचान की गई है, जिनका उपयोग करोड़ों रुपये की साइबर ठगी की रकम के लेन-देन में किया जा रहा था। इस पूरे मामले में पुलिस ने 39 एफआईआर दर्ज की हैं, जबकि 175 लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा चुकी है।
गरिब लोगों को लालच देकर ठगी
पुलिस की जांच में सामने आया कि साइबर ठग आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोगों को कमीशन या अतिरिक्त कमाई का लालच देकर उनके बैंक खाते अपने कब्जे में ले लेते थे। इसके बाद उन्हीं खातों के जरिए ऑनलाइन ठगी, सट्टेबाजी, अवैध ट्रांजैक्शन और अन्य साइबर अपराधों की रकम का लेन-देन किया जाता था। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह एक संगठित गिरोह का हिस्सा है, जो लंबे समय से सक्रिय था।
चौंकान वाला मामलें सामने आया
दुर्ग जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में दर्ज मामलों ने इस नेटवर्क की व्यापकता को उजागर किया है। मोहन नगर थाना क्षेत्र के एक मामले में 111 बैंक खातों के माध्यम से बड़े पैमाने पर ऑनलाइन ठगी का खुलासा हुआ। वहीं, एक अन्य प्रकरण में 22 खातों का इस्तेमाल कर 10 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की गई। सुपेला थाना क्षेत्र में भी 105 बैंक खातों के जरिए एक करोड़ रुपये से अधिक का संदिग्ध लेन-देन सामने आया है।
पोर्टल से अहम जानकारी मिली
दुर्ग के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने बताया कि समन्वय पोर्टल से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर म्यूल अकाउंट धारकों की पहचान कर लगातार कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का मानना है कि ऐसे खातों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होने से ऑनलाइन गेमिंग, सट्टेबाजी और साइबर फ्रॉड जैसे अपराधों पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकेगी। फिलहाल पुलिस इस नेटवर्क की हर कड़ी को जोड़ते हुए इसके मुख्य संचालकों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
बैंक खाता को देना खतरा बन सकता है
पुलिस ने नागरिकों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे किसी भी लालच या कमीशन के बदले अपना बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए न दें। एसएसपी विजय अग्रवाल ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर अपना बैंक खाता साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराता है, तो वह भी कानून के दायरे में आएगा और उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।